Foreign exchange reserves: रूस को पीछे छोड़ भारत बना चौथा बड़ा विदेशी भंडार वाला देश

Foreign exchange reserves: देश का विदेशी मुद्रा भंडार 22 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 4.471 अरब डॉलर बढ़कर 620.441 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.112 अरब डॉलर बढ़कर 615.971 अरब डॉलर हो गया था। यह किसी एक सप्ताह में हुई सर्वाधिक वृद्धि में से एक था।

वहीं इससे पिछले सप्ताह में कुल मुद्रा भंडार 2.816 अरब डॉलर बढ़कर 606.859 अरब डॉलर रहा था। अक्टूबर, 2021 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया था। इस तरह 620 अरब डॉलर के मौजूदा स्तर पर विदेशी , मुद्रा भंडार अपने शिखर से केवल 25 अरब डॉलर दूर है।

Foreign exchange reserves

विदेशी मुद्रा के मामले में दुनिया के टॉप 5 देश

  1. चीन: 3.80 ट्रिलियन डॉलर
  2. जापान: 1.53 ट्रिलियन डॉलर
  3. स्विट्जरलैंड: 1.13 ट्रिलियन डॉलर
  4. भारत: 620,400 बिलियन डॉलर
  5. रूस: 593,400 बिलियन डॉलर

नोट: यह आंकड़े रविवार तक के अपडेट हैं।

पिछले साल से वैश्विक घटनाक्रों की वजह से पैदा हुए दबाव के बीच आरबीआई ने रुपये को समर्थन देने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया था। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल विदेशी मुद्रा भंडार में 57.634 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 22 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियां 4.898 अरब डॉलर बढ़कर 549.747 अरब डॉलर हो गयीं। डॉलर में अभिव्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में घट-बढ़ के प्रभावों को शामिल किया जाता है।

हालांकि, रिजर्व बैंक के अनुसार स्वर्ण भंडार का मूल्य 10.7 करोड़ डॉलर घटकर 47.474 अरब डॉलर रह गया। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) लगभग अपरिवर्तित रहा और यह मात्र 40 लाख डॉलर बढ़कर 18.327 अरब डॉलर हो गया। आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास रखा देश का मुद्रा भंडार 12.9 करोड़ डॉलर घटकर 4.894 अरब डॉलर रह गया।

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश के हित में

जिस देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होता है, उस देश की आर्थिक स्थिति भी अच्छी मानी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि अगर दुनिया में कोई दिक्कत आ जाए तो देश अपनी जरूरत का सामान कई माह तक आसानी से मंगा सकता है। इसीलिए दुनिया के बहुत से देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत बना कर रखते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में निर्यात के अलावा विदेशी निवेश से डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा आती है। इसके अलावा भारत लोग जो विदेश में काम करते हैं, उनकी तरफ से भेजी गई विदेशी मुद्रा भी बड़ा स्रोत होती है।

2023 में डॉलर के खिलाफ रुपये कितना कमजोर हुआ

2 जनवरी 2023 को डॉलर के खिलाफ रुपया 2 पैसे की कमजोरी के साथ 82.74 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं आज 29 दिसंबर 2023 यानी साल के अंतिम ट्रेडिंग डे पर डॉलर के खिलाफ रुपया 4 पैसे की कमजोरी के साथ 83.21 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इस प्रकार से देखा जा सकता है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है, लेकिन डॉलर के खिलाफ रुपया भी कमजोर हुआ है।

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