Foreign Exchange Reserves में देखने को मिली जबरदस्त बढ़ोतरी, जानें सरकारी खजाने का रिजर्व

Foreign Exchange Reserves: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नवंबर के महीने में 24 तारीख को समाप्त हुए सप्ताह तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.54 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 597.93 अरब डॉलर पहुंच गया। आपको बताते चले कि इससे पिछले सप्ताह देश का कुल मुद्रा भंडार 5.007 अरब डॉलर बढ़कर 595.39 अरब डॉलर पहुंच गया था।

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 24 नवंबर को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियां 2.4 डॉलर बढ़ा और इसे 528.53 अरब डॉलर पहुंचा दिया । आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि साल 2021 के अक्टूबर महीने में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था जो अब तक का हाईएस्ट लेवल है।

India Foreign Exchange

वहीं भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 29.6 करोड़ डालर बढ़ोतरी दर्ज की गई जिसके बाद गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 46.34 अरब डालर हो गई। आंकड़ों के मुकाबले एसडीआर 8.7 करोड डालर बढ़कर 18.022 अरब डालर हो गया है। वहीं अगर बात की जाए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की तो उसके पास जमा देश का मुद्रा भंडार 1.4 करोड डॉलर बढ़ा है और अब इसकी कीमत 4.85 अरब डॉलर के आसपास हो गई है।

गौरतलब है कि पिछले साल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई थी। ऐसा इसलिए हुआ था, क्योंकि पिछले साल वैश्विक घटनाक्रम से बने दबाव के बीच आरबीआई ने रुपए की एक्सचेंज रेट में गिरावट को रोकने के लिए इस पूंजी भंडार का इस्तेमाल किया था। और इसी वजह से भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में कमी दर्ज की गई थी। आपको बताते चले की करेंसी एसेट को डॉलर में डिस्क्राइब किया जाता है और इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन अमेरिकन करेंसी मैं बदलाव को भी शामिल किया जाता है।

वहीं 17 नवंबर को जारी आंकड़े से एक सप्ताह पहले देश का कुल मुद्रा भंडार 46.2 करोड़ डालर घटकर 590.321 ही रह गया था।

जाने क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के सेंट्रल बैंक द्वारा रखी गई संपत्तियां या धनराशि होती है, जिसका उपयोग लायबिलिटी को पूरा करने के लिए और मॉनेटरी पॉलिसी को डिसाइड करने के लिए किया जाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक की ओर से जारी किए जाने वाली मुद्राओं को शामिल किया जाता है। इनमें मुद्राओं के साथ बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, अन्य सरकारी प्रतिभूतियों, गोल्ड रिजर्व, विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा राशि को शामिल किया जाता है।

आपको बताते चलें कि विदेशी मुद्रा भंडार कम होने पर देश की अर्थव्यवस्था पर उलटा असर पड़ता है। इससे उस देश के लिए अपने इंपोर्ट बिल का भुगतान करना काफी मुश्किल हो जाता है, इतना ही नहीं उसे देश की मुद्रा में भी दुनिया की अन्य मुद्राओं के मुकाबले तेज गिरावट देखने को मिलती है। गौरतलब है कि ज्यादातर देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर में रखना चाहते हैं, क्योंकि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा व्यापार डॉलर में ही किया जाता है।

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