नई दिल्ली, दिसंबर 26। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार में बीते लगातार चार हफ्ते से कम हो रहा है। इस हफ्ते में भी कमी दर्ज की गई है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 17 दिसंबर 2021 को खत्म हुए हफ्ते में भरत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 करोड़ डॉलर और कम होकर अब यह 635.667 अरब डॉलर बचा है। वहीं आंकड़े के अनुसार 10 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 7.7 करोड़ डॉलर घटकर 635.828 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया था। वहीं इसके पहले 3 दिसंबर 2021 को खत्म हुए हफ्ते के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 642.453 अरब डॉलर के ऑलटाइम हाइ पर था।

विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में ये हैं दुनिया के टॉप 5 देश
- चीन 3.39 ट्रिलियन डॉलर
- जापान 1.40 ट्रिलियन डॉलर
- स्विटरलैंड 1.08 ट्रिलियन डॉलर
- भारत 635,667 बिलियन डॉलर
- रूस 626,300 बिलियन डॉलर
ये हैं आरबीआई के आंकड़े
आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 17 दिसंबर 2021 को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की मुख्य वजह विदेशी मुद्रा आस्तियों (एफसीए) में कमी का होना है। एफसीए कुल मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा होता है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान एफसीए 64.5 करोड़ डॉलर घटकर 572.216 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है। डॉलर में बताए जाने वाले विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे यूरो, पौंड और येन जैसे गैर-अमेरिकी मुद्रा के उतार चढ़ाव को शामिल किया जाता है।
गोल्ड रिजर्व में दर्ज हुई है बढ़त
वहीं समीक्षाधीन अवधि के दौरान देश का गोल्ड रिजर्व बढ़ा है। इस दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 47.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 39.183 अरब डॉलर हो गया है। वहीं समीक्षाधीन अवधि में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पास विशेष आहरण अधिकार 19.089 अरब डॉलर पर अपरिवर्तित रहा। अंतररराष्ट्रीय मुद्रा कोष में देश का मुद्रा भंडार 90 लाख डॉलर बढ़कर 5.179 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश के हित में
जिस देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होता है, उस देश की आर्थिक स्थिति भी अच्छी मानी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि अगर दुनिया में कोई दिक्कत आ जाए तो देश अपनी जरूरत का सामान कई माह तक आसानी से मंगा सकता है। इसीलिए दुनिया के बहुत से देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत बना कर रखते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में निर्यात के अलावा विदेशी निवेश से डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा आती है। इसके अलावा भारत लोग जो विदेश में काम करते हैं, उनकी तरफ से भेजी गई विदेशी मुद्रा भी बड़ा स्रोत होती है।


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