India and Egypt दोनों वस्तुओं की कमी से निपटने के लिए गेहूं के बदले उर्वरक सौदे पर चर्चा कर रहे हैं, इसके साथ ही दोनों ही देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए कदम उठा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए आगे कदम उठा रहे हैं। जून के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिस्त्र यात्रा के दौरान दोनों देशों स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के लिए अपने संबधों को बेहतर और मजबूत किया और वर्ष 2027 तक टू वे ट्रेड को 12 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का टारगेट रखा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नवीनीकरण ऊर्जा, विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, एक फोकस क्षेत्र के रूप में उभरा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गेहूं के बदले उर्वरक सौदे पर चर्चा तब शुरू हुई जब मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान अपने देश की अनाज की आवश्यकता को उठाया। बदले में पीएम मोदी ने उर्वरक की आवश्यकता को उठाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस सौदे पर अभी चर्चा को रही है क्योंकि यह दोनों देशों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
अप्रैल 2022 में मिस्त्र ने भारत को प्रमाणित गेहूं आपूर्तिकर्ता के रुप में मंजूरी दे दी और मिस्त्र की ओर से 63 हजार 500 टन गेंहू का पहला आर्डर भारत सरकार द्वारा मई 2022 में गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के ठीक पहले दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत गेहूं और चावल सहित खाद्यान्न के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। हालांकि, इसको काफी बड़ी मात्रा में और किफायती दरों पर उर्वरकों की जरूरत होती है।
वर्ष 2022 में मिस्त्र के निर्यात में उर्वरक 2.7 अरब डॉलर की बिक्री के साथ दूसरे स्थान पर रहा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मिस्त्र दुनिया का 5वां सबसे बड़ा उर्वरक निर्यातक भी है और यह वार्षिक करीब 7.8 मिलियन टन नाइट्रोजन उर्वरक का निर्माण करता है और करीब 4 मिलियन टन फास्फेट उर्वरक का उत्पादन करता है।


Click it and Unblock the Notifications