Oil: राज्य के स्वामित्व वाली तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) को बंगाल की खाड़ी में कृष्णा गोदावरी बेसिन से उत्पादन शुरू होने के बाद आने वाली तिमाहियों में ऑयल प्रोडक्शन में बढ़ोतरी देखे जाने की उम्मीद है। फाइनेंशियल ईयर 24 के दूसरे क्वार्टर में कच्चे तेल के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जो कि करीब 5 मिलियन मेट्रिक टन से ज्यादा थी। वहीं प्राकृतिक गैस के प्रोडक्शन में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह परियोजना काफी हद तक दूसरे देशों पर कच्चे तेल और गैस के लिए भारत की निर्भरता को भी कम करेगी।

एक रिपोर्ट में गया कहा गया है कि उत्पादन के मोर्चे पर आने वाली तिमाहियों में केजी बेसिन से उत्पादन शुरू होने के बाद तेल और गैस उत्पादन में गिरावट की भरपाई होने की संभावना है। उन्होंने कहा हमने सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) के लिए 4 प्रतिशत वॉल्यूम और फाइनेंशियल ईयर 23-26ई में 6 फीसदी का तेल और गैस वॉल्यूम बनाया है। इससे हम साल 2026 के अंत तक 23.9 एमएमटी तेल और 25.4 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) गैस तक पहुंच सकें।
केजी बेसिन में ओएनजीसी की इस परियोजना से बहुप्रतीक्षित उत्पादन 2023 में शुरू होने की उम्मीद है। ये प्रोजेक्ट तेल उत्पादन की मांग को पूरा करने के साथ कंपनी के तेल उत्पादन में आई कमी की भरपाई करने के लिए काफी अहम माना जाता है। इससे 23 एमएमटी के टोटल ऑयल प्रोडक्शन की उम्मीद की जा रही है। वहीं गैस प्रोडक्शन करीब 50 बिलियन क्यूबिक मीटर तक हो सकती है।
भारत में कच्चे तेल की जरूरत को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत तक क्रूड ऑयल विदेश से इंपोर्ट किया जाता है। वहीं 50 प्रतिशत तक नेचुरल गैस का भी आयात दूसरे देशों से किया जाता है। कच्चे तेल और गैस के लिए दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है और क्रूड ऑयल और गैस के घरेलू उत्पादन पर ज्यादा जोर दे रही है।
एक विदेशी कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की ऑयल प्रोडक्ट डिमांड अक्टूबर में 80000 बैरल प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ी है। वहीं हर साल के आधार पर 197000 बैरल पर डे की डिमांड बढ़ी है, जो कि 4 फीसदी है।
ओएनजीसी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 142.4 % बढ़कर 16533 करोड़ पहुंच गया। यह डाटा सितंबर 30 2023 में खत्म हुए क्वार्टर का है। पिछले साल इस समय तक कंपनी का प्रॉफिट 6830 करोड़ रुपए का था। हालांकि,ऑपरेशन से आने वाला रिवेन्यू दूसरी तिमाही में 12.9 प्रतिशत गिरकर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 1.68 लाख करोड़ रुपये था।
वहीं राज्यों द्वारा संचालित ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस क्वार्टर के दौरान 0.835 एमएमटी क्रूड ऑयल प्रोडक्शन में करीब 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो से तीन सालों में भारत प्रोडक्शन को 4-5 फीसदी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट तक ले जाने की सोच रहा है।
दूसरे क्वार्टर में, ऑयल इंडिया का समेकित शुद्ध लाभ साल-दर-साल 70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 640 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,116 करोड़ रुपये था। इस तिमाही में ऑपरेशन से रिवेन्यू 8,816 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 10,121 करोड़ रुपये से 13 प्रतिशत कम है।
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