नई दिल्ली, फरवरी 17। भारत ने पिछले करीब 2 सालों में चीन को कई व्यापारिक मोर्चे पर तगड़े झटके दिए हैं। भारत चीन को एक झटका दे तो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 20 अरब डॉलर का और इजाफा हो सकता है। जी हां एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि देश उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं (पीएलआई) का लाभ उठा कर चीन से आयात पर निर्भरता कम करे तो भारत की जीडीपी में 20 अरब डॉलर की बढ़ोतरी संभव है। पर इसके लिए चीन से आयात में 50 प्रतिशत तक की कमी करनी होगी। इस बात का खुलासा एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट में हुआ है।
घटाया व्यापार घाटा
आयात पर नजर डालें भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 में भी चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम किया। हालांकि इकोरैप की रिपोर्ट बताती है कि भारत के कुल व्यापारिक आयात में चीन की हिस्सेदारी अब तक लगातार बढ़ी है और बढ़ कर 16.5 प्रतिशत हो गई है। वित्त वर्ष 2020-21 में चीन से भारत ने 65 बिलियन डॉलर का आयात किया। इसमें से करीब 39.5 बिलियन डॉलर की कमोडिटी और गुड्स रहे। इनमें पीएलआई योजना की घोषणा की गई है। इन सेगमेंटों में कपड़ा, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन शामिल हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि पीएलआई योजना के दम पर भारत चीन पर अपनी निर्भरता को 20 प्रतिशत तक भी कम करता है तो इससे देश की जीडीपी को लगभग 8 बिलियन डॉलर का फायदा होगा। मगर यदि ये निर्भरता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है, तो जीडीपी में 20 बिलियन डॉलर का भारी भरकम इजाफा होगा।
कितने प्रोडक्ट्स चीन से आए
चालू वित्त वर्ष में देखें तो अप्रैल-दिसंबर की 9 महीनों अवधि के दौरान चीन से भारत ने कुल 6367 प्रोडक्ट्स मंगाए, जिनकी कुल वैल्यू 68 बिलियन डॉलर होती है। ये कुल आयात का 15.3 प्रतिशत है। एसबीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकतम कुल वैल्यू (9.7 बिलियन डॉलर) उन उत्पादों की है जिनमें चीन पर देश की आयात निर्भरता 50-60 प्रतिशत के बीच है। हालांकि ऐसे उत्पादों की संख्या कम है।
इन उत्पादों का आयात कम
मगर ये भी खुलासा हुआ है कि आयात उस कैटेगरी में सबसे अधिक रहा जहां देश की चीन पर निर्भरता सबसे कम (अधिकतम 10 फीसदी) थी। इनकी वैल्यू लगभग 189.4 करोड़ डॉलर रही। एक और खास बात कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अब तक के सबसे जरूरी आयात पर्सनल कंप्यूटर और टेलीफोनिक और टेलीग्राफिक इक्विपमेंट पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, सोलर सेल, यूरिया और माइक्रो-असेंबली 'लिथियम-आयन और डायमोनियम फॉस्फेट हैं। कुछ सामान इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स का भी है।
इन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि यदि भारत को चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना है, तो कुछ क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित करना होगा। खास कर देश को रसायन, कपड़ा और जूते पर ध्यान देना होगा। ये कम वैल्यू वाले आयात हैं। चीन से आय़ात कम किया जाता है तो इनके इनपुट और फाइनल कंज्यूमर गुड्स देश में ही तैयार हो सकेंगे। साथ ही भारत को अधिक से अधिक ग्लोबल वैल्यू चेन्स (जीवीसी) में इंटीग्रेट करने की सलाह दी गयी है।


Click it and Unblock the Notifications