Indian share Market cap exceeds GDP: भारतीय शेयर बाजार के लिए 2023 शानदार साल रहा है। जहां अभी भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर (4 लाख करोड़ डॉलर) की होने की उम्मीद में है, वहीं भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप 4 ट्रिलियन डॉलर के पार निकल गई है।
मजबूत आर्थिक विकास और विदेशी व घरेलू संस्थागत निवेशकों के निवेश से इस साल अब तक बढ़त के मामले में भारतीय शेयर बाजार ने दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजारों को पीछे छोड़ दिया है। भारत का शेयर बाजार अब दुनिया का बाजार पूंजीकरण के मामले में 4.16 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है। इस प्रकार मार्केट कैप के मामले में भारत का शेयर बाजार दुनिया का पांचवां बड़ा शेयर बन गया है। पिछले वर्ष की तुलना में भारतीय शेयर बाजार ने 24.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है।

2023 में, सेंसेक्स और निफ्टी ने 17.3 प्रतिशत और 18.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है। जबकि बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 43 प्रतिशत और 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
50.35 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन के साथ अमेरिकी शेयर बाजार दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार है। अमेरिकी शेयर बाजार ने 2023 के दौरान 22.61 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (डीजेआईए) में वर्ष के दौरान 12.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं 10.57 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन का शेयर बाजार दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। हालांकि चीन के शेयर बाजार ने 2023 के दौरान 8.81 प्रतिशत दर्ज की है। चीन का शंघाई कंपोजिट 2023 में 5.7 प्रतिशत गिर चुका है।
अन्य एशियाई बाजारों में, जापान का बाजार पूंजीकरण 11.6 प्रतिशत बढ़कर 6.09 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जबकि हांगकांग को लगभग 12.6 प्रतिशत का नुकसान हुआ और यह गिरकर 4.56 ट्रिलियन डॉलर हो गया। 2023 में अब तक हैंग सेंग में 17.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यूरोप में, फ्रांस 13.77 प्रतिशत बढ़कर 3.27 ट्रिलियन डॉलर हो गया और ब्रिटिश शेयर बाजार 5.3 प्रतिशत बढ़कर 3.07 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
सऊदी अरब, कनाडा और जर्मनी ने बाजार पूंजीकरण में क्रमशः 13.1 प्रतिशत, 6.63 प्रतिशत और 12.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो अब 2.97 ट्रिलियन डॉलर, 2.89 ट्रिलियन डॉलर और 2.39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
भारत में तेज विकास जारी
मजबूत अर्थव्यवस्था के सहारे भारत के मजबूत प्रदर्शन ने वैश्विक शेयर बाजार पूंजीकरण में देश के योगदान को पिछले साल के 3.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 2023 में 3.77 प्रतिशत कर दिया है।
विनिर्माण और निवेश क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन के कारण वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। इसने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को वित्त वर्ष 2024 के सकल घरेलू उत्पाद के पूर्वानुमान को संशोधित कर 7 प्रतिशत करने के लिए मजबूर किया। FY25 के लिए, RBI ने पहली तीन तिमाहियों में 6.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि का अनुमान लगाया है।
आरबीआई की तरफ से जीडीपी के संशोधित आंकड़े देश में हो रहे तेज विकास से समर्थित नजर आ रहे हैं। इस दौरान जीएसटी संग्रह, ऑटो बिक्री, बिजली की मांग और विनिर्माण और सेवाओं की विकास दर जैसे डेटा सामने आ रहे हैं।
वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय मजबूत रही, निफ्टी कंपनियों ने साल-दर-साल शुद्ध लाभ में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2023-25 के लिए निफ्टी ईपीएस (प्रति शेयर आय) की औसत वृद्धि दर लगभग 20 प्रतिशत होगी, जिससे संभवतः बाजार की रेटिंग में और बढ़ोतरी हो सकती है।
मजबूत कॉर्पोरेट आय वृद्धि और लचीले घरेलू मैक्रो इकनॉमिक के कारण निवेशकों की राय पहले से ही सकारात्मक थी। माना जा रहा है ताजा आंकड़ों से यह मजबूत होने की उम्मीद है। विश्लेषकों के अनुसार, यह भारत की वृहद और नीतिगत विकास के लिए अच्छा संकेत है, खासकर जब देश सकल घरेलू उत्पाद और कॉर्पोरेट आय दोनों में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक वृद्धि प्रदर्शित कर रहा है।


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