नई दिल्ली, अगस्त 15। वित्तीय स्वतंत्रता का मतलब अधिकतर लोग ढेर सारा पैसा अपने पास होना समझ सकते हैं। मगर वास्तव में, इसका अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मतलब हो सकता है। कुछ लोग वित्तीय स्वतंत्रता को केवल इतना मान सकते हैं कि उनकी बेसिक जरूरतें पूरी हों। कुछ ये मान सकते हैं कि उनके पास हमेशा पर्याप्त बचत हो। कुछ लोग इतना पैसा चाह सकते हैं कि वे आजीवन आराम से बिना कुछ काम किए जीते रहें। हर व्यक्ति को एक बात वित्तीय स्वतंत्रता के मामले में नहीं भूलनी चाहिए कि कुछ फैक्टर ऐसे होते हैं जो आपकी वित्तीय आवश्यकताओं को प्रभावित करते हैं। इनमें मेडिकल खर्च, बच्चों की एजुकेशन और बढ़ती महंगाई शामिल है। कुछ ऐसे फैक्टर होते हैं जिनके लिए आपकी योजना पहले से ही बना लेते हैं। मगर कुछ खर्च अचानक से आ जाते हैं। ऐसे में आप कैसे वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं, यहां हम आपको वही बताएंगे।
केवल बचत काफी नहीं
आम आदमी की सोच के उलट केवल बचत ही एक बड़े फंड को प्राप्त करने का रास्ता नहीं है। मगर फाइनेंशियल प्लानिंग का अर्थ है महंगाई से निपटने के लिए स्मार्ट तरीके से निवेश करके अपने पैसे को बढ़ाना। उदाहरण के लिए, जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं, खासकर अपने काम के वर्षों के दौरान। मगर यही वो समय है जब निवेश करना चाहिए।
जोखिम से बचने के लिए निवेश को मैनेज करना
जैसा कि हमने महामारी के दौरान शेयर बाजार के रुझानों को देखा है, कि सही तरीका यह है कि आप निवेश करने से पहले आर्थिक मंदी का इंतजार न करें। शेयर बाजार कभी भी उतने अनुकूल नहीं हो सकते जितने आप चाहते हैं और इसी वजह से बहुत देर हो सकती है। हालांकि, अगर अस्थिर शेयर बाजार में निवेश करने का विचार आपके लिए सही न लगे तो जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए और भी विकल्प उपलब्ध हैं।
गारंटीड रिटर्न प्लान
शेयर बाजार के बजाय आप किसी गारंटीड रिटर्न प्लान में निवेश कर सकते हैं, ताकि जोखिम न रहे। ऐसे प्लान रिटर्न की गारंटीड रेट के साथ आते हैं जो प्लान खरीदते समय लॉक हो जाते हैं। कम जोखिम वाला विकल्प, एन्युटी प्लान है। यदि आपके पास एक फंड तैयार है, तो आप तत्काल या स्थगित एन्युटी प्लान्स को चुन सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार निश्चित आय या एकमुश्त राशि प्राप्त करना शुरू कर सकते हैं।
टैक्स बेनेफिट का फायदा उठाएं
टैक्स बेनिफिट्स की बात करें तो कुछ निवेश ऑप्शन सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स फ्री लिमिट के साथ आते हैं। वहीं यूलिप प्लान धारा 10 (10) डी के तहत 2.5 लाख रुपये तक के वार्षिक प्रीमियम पर टैक्स फ्री हैं। निवेश के साथ ही टैक्स बेनेफिट का फायदा जरूर लें।
पोर्टफोलियो पर नजर रखना जरूरी
अपना पसंदीदा निवेश साधन चुनने के बाद, समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है। यह देखना जरूरी है कि क्या निवेश आपकी बदलती जरूरतों को पूरा करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने बच्चे की शिक्षा के लिए निवेश कर रहे हैं, तो सलाह दी जाती है कि बढ़ती शिक्षा मुद्रास्फीति के अनुरूप आप अपने पोर्टफोलियो को सालाना रीबैलेंस करें।
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