नई दिल्ली, जनवरी 11। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश किए जाने में काफी कम समय बचा है। इस बीच अनुमान लगाए जा रहे हैं कि बजट में टैक्स या दूसरी चीजों को लेकर क्या घोषणाएं की जा सकती हैं। सामन आई रिपोर्ट के अनुसार सरकार आगामी बजट में सैलेरी पाने वाले करजाताओं और पेंशनभोगियों के लिए उपलब्ध स्टैंडर्ड डिडक्सन की लिमिट में 30-35 फीसदी की वृद्धि करने पर विचार कर रही है। ये ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत हो सकती है। हालांकि मौजूदा आयकर स्लैब में कोई बदलाव न होने की संभावना है।

अभी कितनी है स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट
वर्तमान में टैक्सपेयर्स की इन कैटेगरीज के लिए 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती की अनुमति है। मगर इंडस्ट्री बॉडीज ने इसे बढ़ाने का सुझाव दिया है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पर्सनल टैक्सेशन पर कई सुझाव सामने आए। इस साल एक कॉमन डिमांड स्टैंडर्ड कटौती की सीमा को बढ़ाने की थी। ये मांग खास कर कोविड-19 के कारण मेडिकल खर्चों की बढ़ी हुई लागत को देखते हुए की गयी।
इस आधार पर होगा फैसला
बता दें कि रिपोर्ट में बताया गया है कि टैक्स कलेक्शन स्टेटस के आधार पर इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। नए टैक्स सिस्टम का विकल्प चुनने वाले करदाताओं के लिए कोई स्टैंडर्ड कटौती उपलब्ध नहीं है। तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने 2018 में 40,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती की शुरुआत की थी और बाद में 2019 में अंतरिम बजट में पीयूष गोयल द्वारा इसे बढ़ा कर 50,000 रुपये कर दिया गया था।
राहत देने की मांग
वेतनभोगी क्लास के कोविड-19 महामारी के बीच बिजली और टेलीकॉम जैसे बढ़ते घरेलू खर्चों के कारण इन करदाताओं को कुछ राहत देने की मांग की गई है। कई देशों में कोविड के बीच वर्क फ्रॉम होम के मद्देनजर टैक्स छूट शुरुआत की गयी है, जिसमें ऑफिस सेट अप और महामारी से संबंधित मेडिकल बेनेफिट पर खर्च शामिल है।


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