नई दिल्ली, फरवरी 1। बजट 2022 से आयकर की छूट की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए आज निराशा का दिन रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने बजट में इनकम टैक्स से राहत के नाम पर कुछ भी नहीं दिया है। इसका सीधा सा मतलब है कि इनकम टैक्स के जो स्लैब पहले से लागू हैं, वहीं अगले साल भी लागू रहेंगे।
आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगतार चौथा बजट पेश किया। इस बजट में सरकार की कमाई बढ़ने की बात बताई गई, लेकिन इनकम टैक्स में राहत के नाम पर कुछ भी नहीं रहा। केवल दिव्यांगों को इनकम टैक्स में मामूली सी राहत दी गई है। हालांकि इसके अलावा चुनिंदा स्टार्टअप्स को टैक्स राहत के लिए समयसीमा को बढ़ाकर मार्च 2023 कर दिया गया है।

डिजिटल करेंसी पर लगाया टैक्स
इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्चुअल डिजिटल एसेट से होने वाली आया पर 30 फीसदी टैक्स लगाने की घोषणा की है। इसके अलावा वर्चुअल डिजिटल आसेट ट्रांसफर पर 1 फीसदी टीडीएस का ऐलान किया है।
जानिए कैसे तैयार होता है बजट
बजट को वित्त मंत्रालय अपने नीति आयोग और इससे संबंधित अन्य मंत्रालयों के सहयोग से तैयार करता है। कई एडवाइजर और ब्यूरोक्रेट्स की मदद से वित्त मंत्री इस बजट को बजट तैयार करती हैं। वित्त मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स बजट तैयार करने के लिए नोडल बॉडी है। बजट को किस तरह से बनाया जाना है, क्या शामिल करना है, ये प्रक्रिया लगभग 6 महीने पहले यानी अगस्त-सितंबर में ही शुरू हो जाती है।
जानिए भारत का पहला बजट किसने पेश किया था
भारत का पहला बजट साल 1860 में 18 फरवरी को वायसराय की परिषद में जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जेम्स विल्सन भारतीय वायसराय को सलाह देने वाली परिषद के वित्त सदस्य थे। वहीं अगर स्वतंत्र भारत के पहले बजट की बात की जाए तो पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था।


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