नई दिल्ली। वर्ष 2016 में 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के दौरान सुनारों की दुकानों पर देर रात तक लोग पुरानी नोट खपाने के लिए खरीदारी करते रहे। एक दिन में ज्वैलरों ने महीनों के बराबर का सोना बेच डाला। आयकर विभाग की नजर इस दौरान हुई गड़बड़ियों पर गई है, जिसके मद्देनजर विभाग ने शक के दायरे में आए ज्वैलरों को नोटिस भेजना शुरू किया है।
आयकर विभाग को कालेधन का शक
आयकर विभाग के नोटिस के मुताबिक, उस दौरान जितनी बिक्री हुई है, वह कालेधन से हुई है। इंडियन बुलियन ऐंड जूलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि आयकर विभाग ने पूरे देश में करीब 15 हजार ज्वैलरों को नोटिस भेजे हैं। उनका कहना है कि विभाग इन लोगों से करीब 50 हजार करोड़ रुपये कर के रूप में वसूली करना चाहता है।
ज्वैलरों ने मानी नोटिस मिलने की बात
एक ज्वैलर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि उस समय ऐसे लोग आ रहे थे जो नकद के बदले सोना और हीरे की जमकर खरीदारी की और जितनी बिक्री दो सप्ताह में होती थी, वह एक दिन में होने लगी। तीन महीने पहले आयकर विभाग की तरफ से उन्हें नोटिस मिला और उस दौरान हुई कमाई के बारे में पूछा गया है। संबंधित ज्वैलर ने इस नोटिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन कानून के मुताबिक फिलहाल उसे विवादास्पद राशि का 20 फीसदी जमा करना होगा।
कारोबार पर पड़ेगा बुरा असर
कारोबारियों की दलील है कि इस तरह के नोटिस से इस उद्योग पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है। जिसे नोटिस मिला है उसे सबसे पहले विवादास्पद राशि का 20 फीसदी जमा करना होगा। ऐसे में उसे कर्ज लेकर व्यापार करना होगा। साथ ही यदि कोई मुकदमा हार जाता है तो डिफॉल्टर होने की चुनौती भी सामने आई सकती है।


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