नयी दिल्ली। बैड लोन की पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के करीब है। इस बीच एक नयी रिपोर्ट आयी है, जिसमें एनपीए यानी फंसे हुए कर्ज के मामले में बैंकों की हालत में सुधार हुआ है। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2019 में सितंबर समाप्ति पर बैंकों के सकल गैर-निष्पादित ऋण सुधर कर 9.1 फीसदी पर आ गये, जबकि वित्त वर्ष में यह 11.2 फीसदी पर थे। सभी वाणिज्यिक बैंकों की शुद्ध एनपीए वित्त वर्ष 2018-19 में घट कर 3.7 फीसदी पर आ गईं, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में यह 6 फीसदी थी। आरबीआई ने अपने एक रिपोर्ट में कहा है कि लगातार सात वर्षों तक बढ़ने के बाद वित्त वर्ष 19 में सभी बैंकों के सकल एनपीए अनुपात में गिरावट आयी है।

सरकारी बैंकों ने किया बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट में कहा गया है कि संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के मामले में सरकारी बैंकों ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया, जिन्होंने सकल एनपीए और शुद्ध एनपीए अनुपात दोनों में गिरावट दर्ज की। स्लिपेज अनुपात में गिरावट के साथ-साथ शेष सकल एनपीए में कमी से जीएनपीए अनुपात में सुधार करने में मदद मिली। सरकारी बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 14.6 फीसदी से घट कर 11.6 फीसदी और शुद्ध एनपीए अनुपात 8 फीसदी से घट कर 4.8 फीसदी रह गया।
क्या होता है एनपीए
एनपीए किसी बैंक का वे कर्ज होता है जो डूब गया हो या वापस आने उम्मीद लगभग खत्म हो गयी हो। किसी बैंक के लोन की ईएमआई यानी किस्त 3 महीने पर न आये तो उस खाते को एनपीए मान लिया जाता है। एनपीए 3 प्रकार के होते हैं, जिनमें सब स्टैंडर्ड संपत्तियाँ, संदिग्ध संपत्तियाँ और नुकसान वाली संपत्तियाँ शामिल हैं। एनपीए को लेकर सरकार और आरबीआई ने कई कदम उठाये हैं।
यह भी पढ़ें - नौकरियाँ : अक्टूबर में 12.44 लाख नये रोजगार के अवसर हुए तैयार


Click it and Unblock the Notifications