Fixed Deposit इन्वेस्टमेंट करने का एक बेहतरीन तरीका है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए सही है, जो अपने पैसे को सुरक्षित रखने के साथ ही उस पर फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट चाहते हैं। यह लो रिस्क वाला निवेश का तरीका है, जिसमें आपको गारंटी के साथ रिटर्न मिलता है, इसी वजह से यह पुरानी सोच वाले इन्वेस्टर के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है। अगर आपको फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न चाहिए तो आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए, जिससे आपको बेहतरीन इंटरेस्ट मिलता है और आपका पैसा भी सुरक्षित रहता है।
हालांकि फिक्स्ड डिपॉजिट करने से पहले आपको कई चीज पता होनी चाहिए, लेकिन इस आर्टिकल में हम आपको कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे आपको बेहतर फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम चुनने में काफी मदद मिल सकती है।

ब्याज दर जितनी ज्यादा होगी डिपॉजिट पर उतना ही बेहतरीन रिटर्न मिलेगा। फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते समय बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा दी जाने वाली ब्याज दर को सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर्स में से एक माना जाता है। एफडी खाता खोलने से पहले विभिन्न बैंकों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों की तुलना करना महत्वपूर्ण है। जैसे कई बैंक 8.60 प्रतिशत सालाना की दर से सीनियर सिटीजन को एफडी का रिटर्न दे रहे हैं, वही 60 साल से काम के नागरिकों को 8.35 परसेंट का रिटर्न दे रहे हैं। वहीं कई बैंकों की ब्याज दर 6 से 7 फीसदी के करीब भी होती है।
समय भी फिक्स्ड डिपाजिट का एक बहुत जरूरी फैक्टर है, जिसे एफडी लेते समय हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। आमतौर पर एफडी का टेन्योर (समय) जितना ज्यादा होता है, उतनी ही ज्यादा ब्याज दरें भी आपको मिल सकती हैं। कई सारे बैंक और फाइनेंस कंपनी 1 साल से लेकर 5 साल तक का फ्लेक्सिबल टेन्योर देते हैं, इसलिए आपको टेन्योर का भी खास ख्याल रखना चाहिए।
मिनिमम डिपॉजिट वह रकम होती है, जो एक फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट खोलने के लिए जरूरी होती है। यह रकम अलग-अलग फिक्स्ड डिपॉजिट प्रोवाइडर के हिसाब से अलग-अलग होती है। कुछ कंपनियां 15000 तक का मिनिमम डिपॉजिटअमाउंट देती है। वहीं कुछ कंपनियों में ये रकम ज्यादा और कुछ में कम भी हो सकता है।
ब्याज भुगतान भी एक ऐसा कारक है, जिसे फिक्स्ड डिपाजिट खोलते समय हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। आमतौर पर दो तरह के फिक्स्ड डिपॉजिट होते हैं, जिनमें क्यूम्युलेटिव और नॉन क्यूम्युलेटिव ऑप्शन शामिल हैं। कम्युलेटिव फिक्स्ड डिपॉजिट में आपको एफडी पूरा होने के बाद एक साथ ब्याज दिया जाता है। इन नॉन क्यूम्युलेटिव फिक्स्ड डिपॉजिट में एक निश्चित समय के बाद ब्याज दिया जाता है, यह अवधि मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना हो सकती है।
एफडी रिटर्न कैलकुलेटर एक जरूरी टूल है, इसकी मदद से आपअपने फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले ब्याज को बड़ी आसानी से कैलकुलेट कर सकते हैं। यह एफडी पूरी होने के बाद मेच्योरिटी अमाउंट का सटीक आकलन आपको बता सकता है। साथ ही फिक्स्ड डिपाजिट करते समय आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह किसी भी सुरक्षित और भरोसेमंद संस्था या बैंक से किया गया हो, ताकि आपको बेहतर रिटर्न और पैसों की सुरक्षा दोनों मिल सके।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स भी लगता है। इसलिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से पहले आपको उस पर लगने वाले टैक्स की भी जानकारी होनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: Multibagger Stocks: निवेशकों को दिया छप्परफाड़ रिटर्न, जानिए नाम
More From GoodReturns

अदाणी एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन लॉन्च की अटकलों को किया खारिज, कहा- रिपोर्ट्स निराधार

भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें

Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

Gandhar Oil Refinery के शेयर में लगा अपर सर्किट! मुनाफा और रेवेन्यू ने किया कमाल, अब क्या होगा?

US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

आज खुले 3 बड़े IPO: Indo-MIM, Xtranet और Lohia Corp में निवेश का मौका, जानें क्या है सही रणनीति

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

मुंबई बारिश अलर्ट: बैंकिंग ठप होने पर पैसे की किल्लत से कैसे बचें? जानें स्मार्ट तरीके



Click it and Unblock the Notifications