नई दिल्ली, फरवरी 14। बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) निवेशकों को कई तरह के लाभ प्रदान करती है। मगर इस योजना के कुछ नियम बदले गए हैं, जिनका जानना जरूरी है। यदि आप भी सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर रहे हैं या निवेश करने की सोच रहे हैं तो इन नये और बदले हुए नियमों को जरूर जानें। वरना आपको नुकसान हो सकता है। आगे जानिए क्या हैं बदले हुए नियम।
बेटी कब संभाल सकती है खाता
पहले इस योजना का नियम यह था कि जैसे ही बेटी 10 साल की हो वे खाते को ऑपरेट कर सकती है। मगर अब यदि बेटी का खाता खुलवाया जाए तो वह 18 साल की आयु पर ही इस खाते को ऑपरेट कर सकती है।
ये है दूसरा नियम
एसएसवाई के तहत खाते में सालाना कम से कम 250 रुपये का निवेश करना जरूरी है। यदि कम से कम इतना निवेश न किया गया तो खाता डिफॉल्ट मान लिया जाता है। मगर नए नियमों में एक सहूलियत दी गयी है कि खाता दोबारा एक्टिव न हो तो मैच्योरिटी तक जो जमा राशि खाते में होगी उस पर लागू ब्याज दर से ब्याज दिया जाएगा। अभी तक डिफॉल्ट खातों पर पोस्ट ऑफिस बचत खाते की दर से ब्याज दिया जाता था।
जुड़वां बेटियों का खाता
ये खाता वैसे तो कुल दो बेटियों के नाम पर ही खुलवाया जा सकता है। लेकिन अगर दूसरी बच्ची के जन्म के समय जुड़वां बेटी हों तो आप तीसरा खाता भी खुलवा सकेंगे। यह नियम यदि तीन बेटियां एक साथ हों तो भी लागू होता है।
क्या हैं फायदे
पीपीएफ जैसी अन्य सरकार समर्थित टैक्स बचत योजनाओं की तुलना में एसएसवाई ज्यादा ऊंची ब्याज दर पेश करती है। इस समय पीपीएफ पर 7.1 फीसदी और एसएसवाई पर ब्याज दर 7.6 फीसदी है। इस पर गारंटीड रिटर्न मिलता है। क्योंकि एसएसवाई सरकार समर्थित योजना है, इसलिए यह गारंटीड रिटर्न प्रदान करती है। एसएसवाई पर धारा 80 सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक टैक्स कटौती का लाभ मिलता है। इस स्कीम में एक वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और एक वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा करने की सुविधा मिलती है। यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न वित्तीय स्थिति वाले लोग इस योजना में निवेश कर सकते हैं। सुकन्या समृद्धि योजना एक लंबी अवधि की निवेश योजना है। यह वार्षिक चक्रवृद्धि का लाभ देती है। इससे छोटी छोटी निवेश राशि भी लंबी अवधि में शानदार रिटर्न देगी। सुकन्या समृद्धि खाते का संचालन करने वाले माता-पिता / अभिभावक के ट्रांसफर के मामले में एसएसवाई खाते को देश के एक हिस्से से दूसरे (बैंक / डाकघर) में स्वतंत्र रूप से ट्रांसफर किया जा सकता है।
जानिए एक और जरूरी बात
एक बार लड़की की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो जाए या उच्च शिक्षा से संबंधित खर्चों जैसे फीस या अन्य ऐसे खर्चों को पूरा करने के लिए पिछले वित्त वर्ष के अंत में उपलब्ध बैलेंस के 50 फीसदी तक को खाते से निकालने की अनुमति होती है। कोई लड़की 18 वर्ष की आयु के बाद अपना खाता संचालित कर सकती है। एक बार जब वह 18 वर्ष की हो जाती है, तो वह डाकघर/बैंक जहां खाता है, को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद एसएसवाई के संचालन के लिए पात्र होती है।
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