Kids Money Management: आजकल माता-पिता अपने बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए उन्हें पढ़ाई, खेल, डांस और दूसरी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में बेहतर बनाने में लगे रहते हैं। ताकि उनका फ्यूचर सिक्योर रहे और वह हर रेस में आगे रहं। यह काफी आश्चर्य की बात है कि ज्यादातर माता-पिता मनी मैनेजमेंट यानी धन प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलू को सीखने में या तो चूक जाते हैं या काफी देर कर देते हैं।
मनी मैनेजमेंट बच्चों के लिए एक बहुत ही जरूरी लाइफ स्किल है, जो जीवन के हर पड़ाव में काम आती है। लेकिन यह बच्चों के पाठ्यक्रम के हिस्से में बिल्कुल भी शामिल नहीं है। आमतौर पर बच्चे अपने माता-पिता से मनी मैनेजमेंट के तरीके सीखने हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता बहुत कम उम्र से ही बच्चों की फाइनेंशियल एजुकेशन को बढ़ावा दें।

पैसे को समझना 4 स 5 साल तक के छोटे बच्चों के लिए पहला स्टेप है। इसे सीखने के लिए आप उन्हें सिक्कों का मूल्य सिखाएं और उन्हें सिक्के छांटने दें। इससे न केवल उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि पैसा क्या है, बल्कि यह भी सीखेंगे कि इसे कैसे गिनना है। गुल्लक जैसे इस्तेमाल किए गए और टेस्टेड कॉन्सेप्ट बच्चों को कम उम्र में ही पैसे बचाने और उसकी कीमत से परिचित कराने में मददगार होते हैं।
लगभग 6 से 10 साल की उम्र के बीच आप उन्हें पैसे कमाने के महत्व के बारे में बता सकते हैं। अपने बच्चों को कम उम्र से पैसा कमाने का मूल्य सिखाना महत्वपूर्ण है, क्योकि इससे उन्हें आय, बजट और सीमित पैसों के साथ रहने के कॉन्सेप्ट को समझने में काफी मदद मिलती है। उन्हें अपने कमरे की सफाई करने पर, किराने का सामान लाने में आपकी सहायता करने जैसे आसान काम करने पर कुछ पैसे देने चाहिए, जिससे उन्हें काम करने पर पैसे मिलने का कॉन्सेप्ट समझ में आने लगता है और शायद वह पैसे की कीमत भी करने लगते हैं।
11 से 14 साल की उम्र के भीतर आप अपने बच्चों को बैंकिंग के बारे में बात और सीखा सकते हैं। अपने बच्चों को बचत, निवेश, टैक्सेशन और दूसरे कॉन्सेप्ट को समझने में आपको उनकी मदद करनी चाहिए। यदि आपके बच्चे ने मिले हुए पैसों में से बचत की है, तो उसे खर्च करने के बजाय अपनी बचत को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन दें।
बच्चों द्वारा की गई प्रत्येक 1,000 रुपये की बचत पर आप अपनी तरफ से उन्हें ₹100 दे सकते हैं। इस दौरान आप उन्हें सिखा सकते हैं कि बचत करने से हमें बाद में बेहतर परिणाम और ज्यादा पैसे मिल सकते हैं। यह बच्चों के लिए कंपाउंडिंग के कांसेप्ट को भी मजबूत और आसान बनाता है, क्योंकि हर महीे 100 रुपये का ब्याज उन्हें लंबी अवधि के लिए पैसे बचाने के लिए प्रेरित करती है।
15 से 18 साल की उम्र में बच्चों को निवेश के बारे में बताना चाहिए। अपने बच्चे को एक व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) शुरू करने में मदद करें, जो उन्हें अपने बचाए हुए पैसे का एक हिस्सा ियमित रूप से निवेश करना सिखाता है। आपको उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उनके द्वारा लगाया गया पैसा कैसे बढ़ता है। साथ ही आप बच्चों को उनकी मनपसंद कंपनी के शेयर खरीदने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं, और उन्हें यह भी बता सकते हैं कि शेयर खरीदने के बाद वह आंशिक रूप से कंपनी के मालिक हो जाएंगे।
ये वास्तविक दुनिया के व्यावहारिक अनुभव बच्चों को जरूरी वित्तीय सबक सिखाते हैं, क्योंकि वे अपने पैसे को उनके लिए काम करते हुए देखते हैं, जिससे उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है। फिर चाहे वह कॉलेज के लिए बचत हो, या उनकी पहली कार के लिए पैसे बचा रहे हों।
अपने बच्चों में छोटी उम्र से ही सही वित्तीय आदतें विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसमें पैसे के बारे में खुलकर और स्पष्ट रूप से बोलना शामिल है। जिस दुनिया में हम रहते हैं वह तेजी से खर्च करने के तरीकों को बढ़ावा दे रही है, जिससे धन संबंधी गलत आदतें पैदा हो सकती हैं।
इसका एक सटीक उदाहरण 'बाय नाउ, पे लेटर'' का विकल्प है। जिसके साथ आप पहले सामान खरीद सकते हैं और बाद में उसके पैसे भर सकते हैं। ये चीजें लोगों को बजट से ज्यादा महंगी चीज खरीदने पर मजबूत करती हैं जिससे उनकी जीवन शैली लंबे समय केलिए अस्थिर हो जाती है।


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