नई दिल्ली, मार्च 24। 2022 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक वृद्धि को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने दो प्रतिशत से अधिक घटा दिया है। यूएन ने भारत की अनुमानित विकास दर को घटा कर 4.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके पीछे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को जिम्मेदार बताया गया है। भारत को एनर्जी तक एक्सेस और कीमतों पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही व्यापार प्रतिबंधों, खाद्य मुद्रास्फीति, सख्त नीतियां और वित्तीय अस्थिरता की भी चुनौति है। इन्हीं चीजों का हवाला देते हुए गुरुवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत की अनुमानित विकास दर को कम किया गया है।

ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ
व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की रिपोर्ट ने यूक्रेन युद्ध से झटके और व्यापक आर्थिक नीतियों में बदलाव के कारण 2022 के लिए अपने वैश्विक आर्थिक विकास के अनुमान को भी 3.6 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया, जो विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से जोखिम वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां रूस इस साल एक गहरी मंदी का अनुभव करेगा, वहीं पश्चिमी यूरोप और मध्य, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में ग्रोथ में बड़ी मंदी की उम्मीद है। पहले 2022 में भारत की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था और अब इस अनुमान को घटाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
कुछ देशों को होगा फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण और पश्चिमी एशिया की कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा की मांग और कीमतों में तेजी से वृद्धि से कुछ लाभ मिल सकते हैं। रिपोर्ट में अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ को तीन फीसदी से घटाकर 2.4 फीसदी कर दिया गया है। चीन में भी विकास दर 5.7 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी रह जाएगी। रिपोर्ट में रूस के लिए एक गहरी मंदी का अनुमान लगाया गया है, जिसमें विकास दर 2.3 प्रतिशत से घटकर -7.3 प्रतिशत कर दी गई है।


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