GST 2.0: जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत आपके सेल्फ-केयर सेशन की लागत कम होने की संभावना है। लेकिन आपके घर तक पहुंचाए जाने वाले आरामदायक भोजन आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा बोझ डालेगी। CBIC ने हाल ही में नई दरों और उनके पीछे के तर्क को स्पष्ट करने के लिए एक 'अक्सर पूछे जाने वाले सवाल' गाइड जारी की है।

क्या आप 22 सितंबर के बाद सैलून जाने या योगा क्लास जाने की योजना बना रहे हैं? हो सकता है आपको लगे कि आपका बिल थोड़ा कम हो जाएगा। सेंट्रल बोर्ड टैक्स और कस्टम बोर्ड (CBIC) ने नई वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों के संबंध में नए स्पष्टीकरण जारी किए।
22 सितंबर से पूरे देश में GST 2.0 लागू होने जा रहा है। इस बड़े बदलाव का सीधा फायदा आम लोगों की जेब पर दिखेगा। अब सैलून, जिम, स्पा और योगा क्लास जैसी सेवाओं पर सिर्फ 5% GST लगेगा। यह बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के होगा। यानी पहले इन सेवाओं पर 18% GST देना पड़ता था, अब कम टैक्स की वजह से आपकी मेंबरशिप और बिल पहले से सस्ते हो जाएंगे।
सेल्फ-केयर कितनी सस्ती होंगी?
उदाहरण के लिए, अगर आपका जिम का मासिक शुल्क 1,000 रुपये है, तो जीएसटी लागू होने के बाद यह 1,180 रुपये हो जाता था। अब नई व्यवस्था में यही शुल्क घटकर 1,050 रुपये रह जाएगा। इसी तरह, 500 रुपये की सैलून सेवा पर पहले 590 रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब केवल 525 रुपये ही देने होंगे।
खाने की डिलीवरी महंगी होगी
दूसरी ओर, सभी ऑनलाइन ऑर्डर के लिए खाने की डिलीवरी का शुल्क महंगा होने वाला है। 22 सितंबर से, डिलीवरी सेवाओं पर 18% GST लागू होगा, चाहे वे सीधे हों या जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से करते है।
यह बदलाव क्यों किया गया है?
जीएसटी परिषद की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए यह बड़ा फैसला लिया गया है। अब जीएसटी को केवल दो मुख्य स्लैब, 5% और 18%, में विभाजित किया जाएगा। इसके अलावा, लग्जरी और हार्मफुल वस्तुओं पर 40% की विशेष दर लागू होगी। पुराने 12% और 28% स्लैब को समाप्त कर दिया गया है।


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