IMF report on Indian economy: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व के तमाम देशों के केंद्रिय बैंक के आक्रामक रवैये और यूक्रेन और रूस में लंबे समय से चल रहे युद्ध के नतीजों सहित वैश्विक जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। आईएमएफ इंडिया मिशन के प्रमुख नाडा चौइरी के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली बाधाएं महत्वपूर्ण हैं। ये तमाम बाधाएं जियो पॉलिटिकल घटनाओं पर आधारित है।

आईएमएफ ने घटाई है वृद्धि दर का अनुमान
इस सप्ताह की शुरुआत में वाशिंगटन स्थित फंड ने मार्च 2023 को समाप्त होने वाले वित्त के लिए भारत के विकास के अनुमान को 0.6 प्रतिशत अंक घटाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था। यह अमेरिका के बाद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे बड़ी गिरावट थी। आईएमएफ को इस साल भारत में मुद्रास्फीति को औसतन 6.9 प्रतिशत का अनुमान है। आईएमएफ का कहना है कि खाद्य पदार्थों के दाम और बढ़ेगें।
खाद्य मुद्रास्फिती है एक चुनौती
खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति भारत के लिए एक चुनौती रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के सामने चुनौती ज्यादा है। सितंबर में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। पिछले तीन तिमाहीयों से महंगाई दर उच्च स्तर पर बनी हुई है। आरबीआई ने मुद्रास्फिति से लड़ने के लिए रेपो दरों में पिछले पांच महीने में तीन बार बढ़ोत्तरी की है। चौइरी ने कहा, "हमें मांग को कम करने और मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए दरें बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन आपको अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखना होगा।" "यह एक ऐसा समय है जहां अर्थव्यस्था के साथ-साथ अन्य पहलूओं का भी ख्याल रखना जरूरी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व के तमाम देशों के केंद्रिय बैंक के आक्रामक रवैये और यूक्रेन और रूस में लंबे समय से चल रहे युद्ध के नतीजों सहित वैश्विक जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।


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