
Joint Fixed Deposit : मान लीजिए कोई एक व्यक्ति है। जो अपने बुजुर्ग पिता की देखभाल करता था। जबकि, उसके दूसरे भाई दूसरे शहरों में रहते थे। उस व्यक्ति ने अपने पिता के साथ एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) शुरू की। यह एफडी के लिए उन्होंने ज्वाइंट खाता खोला था और उनके अकांउटेंट नॉमिनी थे। उनके पिता गुजर जाते है। पिता कोई भी वसीयत को छोड़कर नहीं जाते है। इसके बाद जो व्यक्ति है। वो सर्वाइवर क्लॉज के तहत मैच्योरिटी से पहले जो एफडी की राशि है। उस राशि को विद्ड्रॉ करने की कोशिश करता है। हालांकि, उसके जो भाई होते है। उसको कानूनी नोटिस भेजते है और इसके बाद इसके बाद उन्हें जिला अदालत से भी स्टे मिला, उसके भाई जो एफडी की राशि है। उस राशि में उसके पिता का हिस्सा मांगा और विद्ड्रॉल पर रोक की मांग की।
परेशानी किन लोगों के लिए होती है
डाक्यूमेंट्स में क्योंकि पिता को ज्वाइंट होल्डर माना गया था, इसी वजह से जो बैंक है। उन्हें कोर्ट का ऑर्डर मानना पड़ा। इस तरह की जो समस्या है इस समस्या का सामना कई सारे ज्वाइंट अकाउंट होल्डर्स को करना पड़ता है। लगभग सभी बैंकों में एफडी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग इंस्ट्रक्शन के साथ आते हैं। इनमें सर्वाइवर भी शामिल होते है। वहीं, कुछ बैंक ऐसे होते है जहां पर फॉर्मर या सर्वाइवर और लेटर ऑर सर्वाइवर जैसे क्लॉज दिए जाते हैं। बैंक कस्टमर्स को एदर और सर्वाइवर क्लॉज वाले ऑप्शन का चयन करने के लिए कहता हैं, बैंक कस्टमर्स को समझाते है। कि अगर ज्वॉइंट खाताधारक गुजर जाता है, तो फिर जो सर्वाइवर होता है। उस व्यक्ति को पैसे मिलते है।
क्या बताया है आरबीआई ने
आरबीआई की तरफ से इसके अलावा कैंपेन में बताया गया है। कि अगर सभी ज्वाइंट खाताधारक गुजर जाते है, तो फिर पैसे पर नॉमिनी का अधिकार होता है। अगर कोई परेशानी का वक्त आता है, जब एफडी धारक एफडी की राशि को एफडी मैच्योर होने से पहले विद्ड्रॉ करना चाहता है। लेकिन ज्वाइंट खाता धारक गुजर जाता हैं। ऐसा इसी वजह से क्योंकि अगर प्रीमैच्योर विद्ड्रॉल करना है, तो फिर इसके सभी ज्वाइंट खाताधारक के हस्ताक्षर की आवश्यकता होता है।
कानूनी उत्तराधिकारियों की परमिशन लेना आवश्यक है
आरबीआई के मुताबिक, अगर जो खाता है उसको सर्वाइवरशिप क्लॉज के साथ ओपन गया था, तो अगर कोई खाता धारक गुजर जाता है, तो फिर जो नॉमिनी होता है उसको बैलेंस की राशि का भुगतान करना बैंक की जिम्मेदारी बन जाती है। सर्वाइवरशिप क्लॉज के साथ खोला गया था, आरबीआई के नोटिफिकेशन के अनुसार, अगर ज्वाइंट खाताधारक गुजर जाता है, तो फिर अगर व्यक्ति को प्रीमैच्योर विद्ड्रॉल करना है, तो फिर कानूनी उत्तराधिकारियों की परमिशन लेना बेहद आवश्यक है।
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