नई दिल्ली, अगस्त 8। भारत में आयकर अधिनियम के अनुसार मकान मालिक को हाथ में किराए की आय पर गृह संपति से आय नियम के अंतर्गत टैक्स लगाया जाता है। मालिक के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति की किराए की आय पर सरकार की तरफ से कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा। यह अन्य स्त्रोतों से आय कारोबार या पेशे से लाभ और लाभ के तहत कर योग्य होगी।
उन लोगो के लिए नियम जो संपत्ति का रजिस्टर्ड मालिक नहीं है
आयकर अधिनियम के अंतर्गत यह बताया गया है कि अगर किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति संपत्ति का मालिक नहीं है। तो किराया पर आय पर 'घर की संपत्ति से आय' के तहत कर नहीं लगाया जाएगा, उदाहरण किराएदार का उसके किराएदार से किराया लेना।
अधिकारिक आयकर दिशा निर्देश
इसके अलावा ऑफिशियल आयकर दिशा निर्देश में उल्लेख है। कुछ ऐसे मामले जहां कोई व्यक्ति संपत्ति का रजिस्टर्ड मालिक नहीं है। लेकिन उस संपत्ति का मालिक माना जायेगा और संपत्ति के किराए से जो आय होगी उसमे आय कर लगाया जाएगा। इनका उल्लेख नीचे किया गया है।
1. अगर कोई व्यक्ति अपनी घर संपत्ति अपने पत्नी या पति या अपने नाबालिग बच्चे को पर्याप्त विचार के बिना ट्रांसफर करता है। तो हस्तांतरणकर्ता को संपत्ति का मालिक माना जाएगा।
2. अचल संपत्ति के धारक को संपत्ति में शामिल संपत्ति के मालिक के रूप में समझा जाता है।
सहकारी समिति के अन्य संघ के सदस्य के मामले
3. कंपनी या व्यक्तियों या किसी सहकारी समिति के अन्य संघ के सदस्य के मामले के जिसे सोसायटी, कंपनी या एसोसिएशन की घर निर्माण योजना के तहत एक भवन आवंटित या पट्टे पर दिया गया है। संपत्ति के मालिक के रूप में माना जाता है।
4. धारा 53ए संपत्ति के हस्तांतरण अधिनियम की शर्तो को पूरा करके संपत्ति प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मामले के मालिक के रूप में माना जायेगा। उक्त अधिनियम की धारा 53ए के तहत निम्नलिखित शर्ते है लिखित में एक समझौता होना चाहिए।
5. 12 वर्ष से अधिक के समय के लिए एक संपत्ति के पट्टे के मामले में पट्टेदार को संपत्ति का मालिक माना जाएगा। महीने दर महीने या एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पट्टे के रूप में कोई भी अधिकार इस प्रावधान के अन्तर्गत नही आता है।


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