दिग्गज टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर है। घाटे में जूझ रही वोडाफोन-आइडिया की एक बार फिर सुर्खियों है।
नई दिल्ली: दिग्गज टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया के ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर है। घाटे में जूझ रही वोडाफोन-आइडिया की एक बार फिर सुर्खियों है। जी हां घाटे और पैसों की कमी से जूझ रही वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कंपनी के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। बिड़ला ने कहा कि अगर सरकार एजीआर इश्यू पर टेलिकॉम कंपनी को अपनी ओर से राहत नहीं देती है तो यह बंद हो जाएगी।

राहत नहीं मिली तो वोडाफोन-आइडिया बंद हो जाएगी
हमें सरकारी राहत न मिलने की वजह से कंपनी बंद करनी पड़ेगी। इस बात की जानकारी उन्होंने एक मीडिया द्वारा आयोजित कर्याक्रम में कही हैं। बिरला ने कहा कि टेलिकॉम कंपनी को अगर सरकार ने जरूरी राहत नहीं दी तो हम इसमें भविष्य में किसी तरह का निवेश नहीं करेंगे। इस बात का कोई मतलब नहीं रह जाता कि हम गुड मनी को बैड मनी में बदल दें। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि राहत न मिलने की कंडीशन में कंपनी इन्सॉल्वेंसी का रास्ता नहीं अपनाएगी।
वोडाफोन आइडिया को रिकॉर्ड घाटा सितंबर तिमाही में
बता दें सितंबर तिमाही में वोडाफोन आइडिया को 50,921 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड घाटा हुआ है। यह अभी तक किसी भी भारतीय कंपनी को हुआ सबसे ज्यादा तिमाही घाटा है। इसकी मुख्य वजह कंपनी पर मौजूद एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR बकाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वोडाफोन आइडिया पर सरकार की अनुमानित 44,150 करोड़ रुपये की देनदारी है। 2019-20 की दूसरी तिमाही में इस बकाए को चुकाने के लिए कंपनी ने 25,680 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।
सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करते हुए ही वोडाफोन आइडिया की ओर से कहा गया था कि वह AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट आदेश पर पुर्नविचार याचिका दाखिल करने जा रही है। कंपनी का चल पाना इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार से राहत मिलती है या नहीं और कानूनी मसलों का कोई सकारात्मक समाधान होता है या नहीं।
बिड़ला की संपत्ति में 2017 के बाद से एक तिहाई की कमी
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की संपत्ति में 2017 के बाद से एक तिहाई की कमी आई है। बिड़ला की नेट वर्थ दो साल में 9.1 अरब डॉलर से गिरकर 6 अरब डॉलर हो गई है। बिड़ला ग्रुप की कंपनी आइडिया ने पिछले साल वोडाफोन के साथ हाथ मिलाये थे। वोडाफोन आइडिया को इसके बाद बड़ा घाटा झेलना पड़ा है। वहीं 2016 में भारत के टेलिकॉम सेक्टर में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो के आने के बाद से उसकी दोनों प्रतिद्वंद्वी कंपनियां एयरटेल और वोडाफोन लगातार घाटे में रही हैं। इसके अलावा बिरला की दूसरी फ्लैगशिप फर्म जो कैमिकल, मेटल्स और सीमेंट का उत्पादन करती हैं, उनको भी लगातार घाटा हुआ है।
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