नई दिल्ली, सितंबर 14। हाल के हफ्तों में रुपया काफी गिरा है। एक समय डॉलर के मुकाबले रुपया 80 के भी स्तर को पार कर गया था। मगर फिर दोबारा रुपये ने थोड़ा दम दिखाया। हालांकि आज रुपया डॉलर के मुकाबले गिरावट के साथ बंद हुआ। आज डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे गिर कर 79.44 के स्तर पर बंद हुआ। आज डॉलर के मुकाबले सुबह रुपया 40 पैसे की कमजोरी के साथ 79.55 के स्तर पर खुला था। इससे पहले मंगलवार ये डॉलर के मुकाबले 38 पैसे मजबूत होकर 79.15 के स्तर पर बंद हुआ। पर क्या आप जानते हैं कि डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरने से आम भारतीय की जेब पर क्या असर पड़ता है? आगे जानिए इस जरूरी सवाल का जवाब।
क्या है रुपये के गिरने का मतलब
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि रुपये के गिरने का क्या मतलब है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले यदि रुपया गिरता है तो इसका साफ मतलब है कि भारतीय करेंसी कमजोर हो रही है। अब इसका पहला असर यह होता अमेरिका या किसी अन्य देश से जो सामान आयात किया जाएगा भारत को उसके लिए अधिक भुगतान करना होगा। इसकी वजह यह है कि भुगतान डॉलर में होता है। अब जब डॉलर मजबूत होगा तो आयात लागत अधिक होगी और भुगतान भी अधिक करना होगा।
आप पर पड़ेगा ये असर
जैसा कि हमने बताया कि रुपये के कमजोर होने से आयात के लिए अधिक भुगतान करना होगा। अब डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर है, इसलिए आयातक जितना सामान पहले मंगाते थे उतने ही सामान के लिए अधिक भुगतान करेंगे। जाहिर सी बात ऐसे में महंगाई बढ़ेगी। यदि आप विदेश पढ़ने के लिए जाएं तो फीस अधिक लगेगी। जो लोग विदेशों से भारत में पैसा भेजते हैं उसकी लागत बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ रुपये के कमजोर होने से निर्यात सस्ता हो जाता है।
आयातित चीजों पर असर
हम (भारत) अपनी जीडीपी का 20.96 प्रतिशत आयात करते हैं। जो चीजें आयात की जाती हैं उनमें खनिज ईंधन, तेल, विद्युत मशीनरी, परमाणु रिएक्टर, यांत्रिक उपकरण और आभूषण शामिल हैं। इन सभी को आयात करने के लिए डॉलर में पेमेंट होती है तो डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने पर इन क्षेत्रों पर असर पड़ता है।
तेल-गैस, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स
भारत को अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक तेल और 50 फीसदी से अधिक गैस आयात करनी पड़ती है। अब डॉलर मजबूत होगा तो तेल-गैस आयातकों की खरीद लागत में वृद्धि होगी। इसके नतीजे में कई चीजें महंगी होने लगती हैं। क्योंकि तेल गैस महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर महंगे होते हैं। इसी तरह एफएमसीजी प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स भी महंगे होते हैं। डॉलर की कीमत बढ़ जाए तो आपको इन चीजों के लिए अधिक पैसे चुकाने होते हैं।
क्यों गिरता है रुपया
रुपये में गिरावट के कारण होते हैँ। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पैसा निकालना और घरेलू कारोबार में सुस्ती शामिल होती है। इसी तरह के और भी कारण हैं, जिनके चलते रुपया कमजोर होता है।
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