नई दिल्ली, अगस्त 16। एक रिपोर्ट में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने खुलासा किया है कि देश में बेचे जाने वाले दूध और दुग्ध प्रोडक्ट का 68 फीसदी से ज्यादा खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से कहा गया है कि इस तरह कि मिलावट की तुरंत जांच नही की गई तो देश के अंदर वर्ष 2025 तक 87 प्रतिशत लोग कैंसर के शिकार हो सकते हैं। चलिए आज हम आपको जांच करने का तरीका बता रहे है।
सबसे ज्यादा मिलावट त्योहारों में होती है
दूध और दुग्ध पदार्थो में सबसे अधिक मिलावट त्योहारों के सीजन में होती है। लोग इस समय अधिक मात्रा में मिठाई खरीदते है। आम लोग डेयरी या घर घर जाकर दूध बेचने वाले से दूध खरीदते है। वही दूध मिलावट वाला होता है और वो मिलावटी दूध सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है। ये नुकसान तुरंत नही होता धीरे धीरे होता है। मगर एक समय के बाद शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में बुरा असर डालता है।
ऐसी होती है दूध में मिलावट
दूध को ज्यादा करने के लिए उसमे अधिक पानी मिला दिया जाता है और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेयरी वाले कास्टिक सोडा, सफेद पेंट और रिफाइंड ऑयल की मिलावट कर देते हैं। जो धीमा जहर में बदल जाता है। इस मिलावट से दूध हार्ट, लीवर और किडनी में बहुत नुकसान पहुंचता है। इसका समय लंबे समय तक किया जाए तो ये शरीर को कमजोर कर देता है।
ऐसे पता लगाए नकली दूध का
यदि आप दूध को हथेलियों के बीच में रगड़ते है तो आपको लगे की साबुन जैसा है तो सिंथेटिक दूध हो सकता है। दूध की पहचान करने का एक तरीका यह भी है। दूध को गर्म करने पर यह पीला हो जाता है। स्टार्च की मिलावट की जांच करने के लिए दूध में कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालने पर अगर उसका रंग नीला हो जाए यानी कि यह मिलावटी दूध है।


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