भारत में अप्रैल 2026 की गर्मियों ने उम्मीद से कहीं पहले और ज्यादा कड़े तेवर दिखाए, जिसका सीधा असर देश के बिजली बाजार पर साफ नजर आया। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) ने अप्रैल 2026 में कुल 12,341 MU (मिलियन यूनिट) बिजली का ट्रेड दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 16.6% की शानदार बढ़त दिखाता है। यह उछाल सिर्फ कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह कहानी है उन करोड़ों एयर कंडीशनर्स की जो एक साथ चल रहे थे, उन बिजली कंपनियों (DISCOMs) की जो बिजली जुटाने के लिए जद्दोजहद कर रही थीं और उस एनर्जी मार्केट की जिसकी अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा हो रही थी।
IEX अप्रैल 2026 वॉल्यूम: जब हीटवेव ने तोड़े डिमांड के रिकॉर्ड
अप्रैल का महीना मौसम के बड़े उतार-चढ़ाव वाला रहा। कभी बेमौसम बारिश हुई तो कभी भीषण गर्मी ने झुलसाया। इसी वजह से भारत की बिजली खपत सालाना आधार पर 4% बढ़कर 154 BU तक पहुंच गई और बिजली की मांग (Peak Demand) 256 GW के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर जा पहुंची। इस बार अप्रैल में जो बात सबसे अलग थी, वह सिर्फ गर्मी नहीं बल्कि उसकी टाइमिंग थी। आमतौर पर बिजली की इतनी मांग जून या जुलाई में देखी जाती है, लेकिन इस साल भीषण गर्मी के चलते यह हफ्तों पहले ही आ गई।

रियल-टाइम मार्केट ने बनाया एक दिन की ट्रेडिंग का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
अप्रैल के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली बात 'रियल-टाइम मार्केट' (RTM) से निकलकर आई। अप्रैल 2026 में RTM वॉल्यूम बढ़कर 5,069 MU हो गया, जो अप्रैल 2025 में 3,893 MU था—यानी इसमें 30.2% का बड़ा उछाल आया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि 30 अप्रैल 2026 को RTM ने एक ही दिन में 250 MU के ट्रेड का अपना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया। यह दिखाता है कि बिजली कंपनियां और कमर्शियल ग्राहक अब अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट का कितना ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
डे-अहेड मार्केट: कीमतें थोड़ी बढ़ीं, लेकिन बारिश ने दी मामूली राहत
डे-अहेड मार्केट (DAM) में भारी मांग के चलते खरीदारी की बोलियां (buy bids) सालाना आधार पर 31% बढ़ गईं, जबकि बिक्री की बोलियां (sell bids) भी 35% बढ़ीं। औसत मार्केट प्राइस 5.26 रुपये प्रति यूनिट रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 1% ज्यादा है। हालांकि, पूरा महीना एक जैसा महंगा नहीं रहा। अप्रैल की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश ने मांग को थोड़ा कम किया, जिससे कई दिनों तक DAM की कीमतें 3.5 रुपये प्रति यूनिट से नीचे रहीं। इसने बिजली कंपनियों और बड़े ग्राहकों को सस्ती बिजली खरीदने और अपनी लागत कम करने का एक अच्छा मौका दिया।
| मार्केट सेगमेंट | अप्रैल 2026 वॉल्यूम (MU) | अप्रैल 2025 वॉल्यूम (MU) | सालाना बदलाव (YoY) |
|---|---|---|---|
| डे-अहेड मार्केट (DAM) | 4,624 | 4,254 | +8.7% |
| रियल-टाइम मार्केट (RTM) | 5,069 | 3,893 | +30.2% |
| टर्म-अहेड मार्केट (TAM) | 1,807 | 1,656 | +9.1% |
| ग्रीन मार्केट | 841 | 782 | +7.5% |
| कुल | 12,341 | 10,585 (लगभग) | +16.6% |
बिजली कंपनियों, ग्राहकों और आपके बिल पर क्या होगा असर?
रियल-टाइम मार्केट में भी यही ट्रेंड दिखा, जहां महीने के दौरान कई बार कीमतें शून्य के करीब पहुंच गईं। ऐसा सोलर पावर के घंटों के दौरान सरप्लस रिन्यूएबल एनर्जी की वजह से हुआ। समझदार खरीदारों के लिए यह सीधा फायदा था। बिजली कंपनियों और कमर्शियल ग्राहकों के पास इस सस्ती बिजली के जरिए अपनी मांग पूरी करने और एक्सचेंज से बिजली खरीदकर अपनी लागत घटाने का मौका था। आम घरों के लिए शायद इसका तुरंत असर बिल पर न दिखे, लेकिन अगर बिजली कंपनियां कुशलता से खरीदारी करती हैं, तो लंबे समय में टैरिफ का दबाव कम हो सकता है।
ग्रिड पर बढ़ा दबाव, कोयला बना संकटमोचक
27 अप्रैल को दिल्ली स्थित AQI मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म के डेटा ने बताया कि दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में ही थे। S&P ग्लोबल एनर्जी के आंद्रे लैम्बिन के मुताबिक, "भारत के कई हिस्सों में 40-45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान और हीटवेव ने बिजली की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है।" ऐसे में कोयला और गैस आधारित पावर प्लांट बेहद जरूरी हो गए हैं, खासकर शाम और रात के वक्त जब सोलर पावर उपलब्ध नहीं होती। भारत का ग्रिड फिलहाल तो संभला हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि सिस्टम अब अपनी पूरी क्षमता की सीमाओं पर काम कर रहा है।
IEX ग्रीन मार्केट और रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती रफ्तार
IEX ग्रीन मार्केट (जिसमें ग्रीन डे-अहेड और ग्रीन टर्म-अहेड सेगमेंट शामिल हैं) ने अप्रैल 2026 के दौरान 841 MU का वॉल्यूम हासिल किया, जो पिछले साल से 7.5% ज्यादा है। अच्छी बात यह रही कि ग्रीन डे-अहेड मार्केट में औसत कीमत 3.79 रुपये प्रति यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 6.9% कम है। ग्रीन पावर की गिरती कीमतें रिन्यूएबल सेक्टर की मजबूती का संकेत हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने रिन्यूएबल एनर्जी के लिए 500 मेगावाट के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसे 76 करोड़ रुपये के स्टेबलाइजेशन फंड का सपोर्ट मिलेगा। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
आगे और बढ़ेगी तपिश: 270 GW तक जा सकती है डिमांड
अप्रैल का यह रिकॉर्ड शायद ज्यादा दिनों तक न टिके। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में बिजली की अधिकतम मांग और बढ़ेगी। बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि इस गर्मी में डिमांड 270 गीगावाट (GW) तक पहुंच सकती है। भारत में बिजली की बढ़ती मांग अब केवल औद्योगिक चक्र पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हीटवेव, कूलिंग की बढ़ती जरूरतों और शहरीकरण से है। मई और जून में पारा और चढ़ने की संभावना है, जिससे देश के पावर मार्केट और बिजली वितरण ढांचे पर दबाव और बढ़ना तय है।
More From GoodReturns

नया मल्टी-एसेट NFO: SIP या एकमुश्त, निवेश से पहले ये 5 बातें जरूर जानें

EMI और क्रेडिट कार्ड बिल: सोमवार को बैंक अकाउंट में रखें बैलेंस, वरना कटेगा भारी जुर्माना

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Airtel का बड़ा झटका: अचानक बंद हुए कई लोकप्रिय प्रीपेड प्लान, रिचार्ज से पहले जानें ये जरूरी बात

जियो नेटफ्लिक्स बिलिंग में अचानक बदलाव! कहीं आपका प्लान तो नहीं हुआ डाउनग्रेड? चेक करें तुरंत

₹399 से कम में अनलिमिटेड 5G और OTT का तड़का, Jio, Airtel और Vi के बेस्ट प्लान्स की पूरी सच्चाई

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

PMFBY खरीफ 2026: आज है रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, बैंक बंद होने पर भी ऐसे करें आवेदन

Shiprocket Listing Today: शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! क्या ₹120 के पार खुलेगा भाव?

शेयर बाजार का नया नियम: 3:15 बजे के बाद कैसे करें ट्रेड? CAS सेशन में मुनाफे का सही तरीका



Click it and Unblock the Notifications