केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन के जरिए बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा रकम मिलने की उम्मीद है। सरकारी बैंक IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने के फैसले से सरकार की कमाई को बड़ा सहारा मिलेगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जबकि अब कुल प्राप्तियां करीब 88,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यानी सरकार को तय लक्ष्य से करीब 8,000 करोड़ रुपये ज्यादा मिलने की उम्मीद है।

IDBI Bank की रणनीतिक बिक्री में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी संयुक्त 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर को बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी। इस सौदे के तहत सरकार अपनी हिस्सेदारी के साथ LIC की हिस्सेदारी का भी एक बड़ा हिस्सा बेचेगी। इस प्रक्रिया का मकसद बैंक में रणनीतिक निवेशक की भागीदारी बढ़ाना और उसके प्रबंधन में बदलाव का रास्ता तैयार करना है।
LIC 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी-
इस सौदे में सरकार अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC की 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखी गई है। इस सौदे से केंद्र सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। वहीं, LIC को भी अपनी हिस्सेदारी बेचने से बड़ी रकम मिलेगी। सौदे के बाद IDBI Bank में केंद्र सरकार की 15 फीसदी और LIC की 19 फीसदी हिस्सेदारी बची रहेगी। यानी दोनों की कुल हिस्सेदारी घटकर 34 फीसदी रह जाएगी।
पहले ही जुटाए ₹62,124 करोड़-
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन के जरिए 62,124 करोड़ रुपये जुटा चुकी थी। इसमें 55,757 करोड़ रुपये सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर और 6,367 करोड़ रुपये एसेट मॉनेटाइजेशन से मिले थे। इस तरह सरकार अपने 80,000 करोड़ रुपये के सालाना लक्ष्य से केवल 17,876 करोड़ रुपये पीछे थी। IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री से यह अंतर पूरा होने और कुल प्राप्तियां लक्ष्य से आगे निकलने की उम्मीद है।
पिछले साल लक्ष्य से पीछे रह गई थी सरकार-
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से कुल 45,306 करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि लक्ष्य 47,000 करोड़ रुपये का था। इसमें 16,886 करोड़ रुपये विनिवेश से और 28,420 करोड़ रुपये एसेट मॉनेटाइजेशन से आए थे। वित्त वर्ष 2018-19 के बाद सरकार लगातार अपने शुरुआती बजटीय लक्ष्य को हासिल करने में पीछे रही है। ऐसे में IDBI Bank का सौदा इस साल की सरकारी प्राप्तियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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