नई दिल्ली, सितंबर 16। देश में अब खेती केवल परांपरिक नहीं रह गई है। देश के किसान अब कॉमर्शियल खेती की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। किसानों ने अब उन फसलों की बुआई करना शुरू किया है जिसमें मुनाफा लागत के कई गुना हो। सब्जि की खेती हमेशा से ही फायदेमंद साबित हुई है। सब्जियों में भिंडी देश के हर हिस्से में पसंद किया जाता है। हरी भिंडी की खेती फायदे का सौदा तो होती है लेकिन देश के किसान अब लाल भिंडी की भी खेती कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि लाल भिंडी हरी भिंडी से ज्यादे फायदेमंद हैं। लाल भिंडी की किमत बाजार में हरी भिंडी के मुकाबले काफि अधिक है।
वराणसी में हुआ है इजात
लाल भिंडी को काशी की लालिमा के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने लाल भिंडी की प्रजाती उगाई है। अब लला भिंडीं की खेती देश के तमाम प्रदेशों में होने लगी है। अब इस प्रजाती के भिंडी के बीज भी बाजारों में मिलने लगे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली के किसान लाल भिंडी की खेती करने लगे हैं। लाल भिंडी की फसल तैयार होने में भी ज्यादा समय नहीं लेती है और यह 40-45 दिन में तैयार हो जाती है।
साल में दो बार होती है खेती
लाल भिंडी को साल में दो बार उगाजा जा सकता है। किसान फरवरी-मार्च के समय इसकी बुआई कर सकते हैं, साल में जून-जुलाई का समय भी इसकी खेती के लिए अनुकुल है। किसान को यह ध्यान रखना जरूरी है कि भिंडी के पौधों को 5-6 घंटे की धूप लगना जरूरी होता है। अनुसंधान में पाया गया है कि बुआई के लिए दोमट मिट्टी इसके लिए बेहतर है। लाल भिंडी की खेती में किसी खास टेक्निक का इस्तेमाल नहीं करना है, इसकी खेती हरी भिंडी की तरह ही होती है। प्रति एकड़ के हीसाब से भिंडी की उपज 20 क्विंटल की है। लाल भिंडी की अधिकतम लंबाई 7 इंच तक हो सकती है।
लाल भिंडी है लाभदायक
लाल भिंडी सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें एंथोसाइन तत्व मिलता है। लाल भिंडी में पाए जाने वाले इस तत्व से शरीर को एनर्जी मिलती है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। जानकार बताते हैं कि इस फिंडी में फाइबर और आयरन की मात्रा प्रचूर होती है। जानकारों का कहना है कि लाल भिंडी को पका के खाने के बजाय सलाद के रुप में प्रयोग करना चाहिए।
कितनी हो सकती है कमाई
लाल भिंडी की बुआई करने में कोई खास लागत नहीं आती है। लाल भिंडी थोक भाव में 500 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक जाते हैं कभी-कभी इसके दाम 800 रुपए प्रति क्विंटल हो जाते हैं। इस तरीके से भिंडी की खेती एक अच्छा कमाई का साधन है।
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