Festive Cheer and Cautions: भारत की अर्थव्यवस्था हर साल त्योहारों के मौसम में एक नई ऊर्जा और उत्साह से भर उठती है। यह वह समय होता है जब उपभोक्ता खर्च में तेजी आती है। बाजारों में रौनक लौटती है और उद्योगों को नई गति मिलती है।

लेकिन इस बार, Ambit Capital की रिपोर्ट के अनुसार, यह त्योहारी सीजन पहले जितना चमकीला नहीं होगा। आर्थिक संकेतकों और श्रम बाजार के हालात बताते हैं कि उपभोग बढ़ोतरी पर दबाव रह सकता है, खासकर शहरी क्षेत्रों में, जबकि ग्रामीण और टियर-2 और टियर-3 शहर अर्थव्यवस्था को सहारा देंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले वर्ष के त्योहार सीजन में लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21% अधिक था। दिल्ली अकेले देश के कुल त्योहारी कारोबार में लगभग 21% हिस्सेदारी रखती है। यह त्योहारी रौनक शादी के मौसम तक जारी रहने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था में एक विस्तारित कारोबारी चक्र देखने को मिल सकता है। जानते है कि GST रेट में कटौती और टैरिफ का असर आने वाले त्योहारी के दौरान में होने वाली खरीदारी पर क्या पड़ने वाला है?
GST कटौती का असर
हाल ही में की गई GST रेट में कटौती का असर बाजार पर मिला-जुला रहेगा। जहां यह कार, टू-व्हीलर, एसी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महंगे प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ाने में मदद करेगी, वहीं कम मूल्य वाले उत्पादों (FMCG आदि) पर इसका प्रभाव बहुत सीमित रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 12% टैक्स स्लैब से 5% पर आए उत्पादों से निम्न-आय वर्ग को केवल 2% तक की ही वास्तविक आय बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा, जो बहुत कम है। इसके अलावा, कई रिटेलर्स और ब्रांड्स उपभोक्ताओं तक पूरी टैक्स राहत नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता धारणा कमजोर बनी हुई है।
अधिकांश उपभोक्ता यह महसूस नहीं कर पा रहे कि GST कटौती के बाद कीमतें वाकई में घटी हैं। केवल एक चौथाई उपभोक्ता ही इस बात पर भरोसा जताते हैं। ऐसे में टैक्स राहत से व्यापक उपभोग बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सरकार द्वारा हाल ही में की गई GST रेट में कटौती से बाजार में कुछ सकारात्मक संकेत तो मिले हैं, लेकिन इसका लाभ सभी उपभोक्ता वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत मुख्य रूप से उन वस्तुओं के लिए ज्यादा असरदार होगी जिनकी कीमतें ऊंची हैं, जैसे कि यात्री वाहन (Passenger Vehicles) और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद। इसका कारण यह है कि इन वस्तुओं में कीमतों में कटौती स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, और उपभोक्ताओं के पास इन्हें खरीदने के लिए फाइनेंसिंग विकल्प भी अधिक उपलब्ध हैं।
टैरिफ का प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भारत की श्रम-प्रधान निर्यात इंडस्ट्री पर गंभीर असर डाल सकता है। चमड़ा, वस्त्र और आभूषण जैसे सेक्टरों पर 50% तक का टैरिफ लगने से बड़े पैमाने पर नौकरियों का नुकसान हो सकता है। इन सेक्टरों का 20% से अधिक निर्यात अमेरिका को जाता है। इसलिए अल्पावधि में वैकल्पिक बाजार तलाशना मुश्किल होगा। यूपी और गुजरात के निर्यातकों ने पहले ही संकेत दिया है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही, तो हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है।
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