Mutual Funds: निवेश से पहले जानें TER, फायदे में रहेंगे

How do mutual fund companies collect TER: म्युचुअल फंड निवेशकों को निवेश से पहले फायदे और नुकसान को लेकर कुछ बातें ध्यान में रखना चाहिए। सेबी ने म्यूचुअल फंड में आने वाले प्रबंधन के खर्च को लेकर कुछ दिन पहले नियम बदले थे। यह नियम म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में टोटल एक्सपेंस रेश्यो (टीईआर) को लेकर थे। इसका मतलब है कि म्युचुअड फंड कंपनियां अब तय टोटल एक्सपेंस रेश्यो (टीईआर) से ज्यादा फीस नहीं वसूल सकती हैं। ऐसे में म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले इस बारे में जरूर जान लेना चाहिए।

शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी ने टोटल एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय कर दी है। ओपन एंडेड इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में आसेट अंडर मैनेजमेंट के हिसाब से सेबी ने टोटल एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय की है। इसलिए अब निवेश से पहले म्युचुअल फंड स्कीम का टोटल एक्सपेंस रेश्यो जरूर जान लेना चाहिए।

How do mutual fund companies collect TER

जिस म्यूचुअल फंड स्कीम की आसेट अंडर मैनेजमेंट (एएमयू) 500 करोड़ रुपये तक है, वे टोटल एक्सपेंस रेश्यो के रूप में अधिकतम 2.25 फीसदी फीस के रूप में ले सकते हैं।

इसी तरह 500-750 करोड़ रुपये की आसेट अंडर मैनेजमेंट वाली स्कीम के लिए टोटल एक्सपेंस रेश्यो 2 फीसदी तक है।

750-2,000 करोड़ रुपये के आसेट अंडर मैनेजमेंट वाली स्कीमों के लिए टोटल एक्सपेंस रेश्यो 1.75 फीसदी तक है।

वहीं 2000-5000 करोड़ रुपये आसेट अंडर मैनेजमेंट वाली स्कीम के लिए टोटल एक्सपेंस रेश्यो 1.6 फीसदी है।

5000-10,000 करोड़ रुपये आसेट अंडर मैनेजमेंट वाले फंड के लिए टोटल एक्सपेंस रेश्यो 1.5 फीसदी है।

अगर किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का आसेट अंडर मैनेजमेंट 50,000 करोड़ से अधिक है तो उसके लिए म्युचुअल फंड कंपनी टोटल एक्सपेंस रेश्यो के रूप में 1.05 फीसदी चार्ज ले सकती हैं।

वहीं सेबी ने साफ किया है यह अधिकतम टोटल एक्सपेंस रेश्यो की सीमा है, लेकिन अगर कोई म्युचुअल फंड कंपनी इससे कम टोटल एक्सपेंस रेश्यो लेना चाहे तो वह ले सकती है। हालांकि टोटल एक्सपेंस रेश्यो की तय सीमा से ज्यादा फीस कोई भी म्युचुअल फंड कंपनी नहीं वसूल सकती है।

अगर आप ने किसी म्युचुअल फंड कंपनी की स्कीम में 1 लाख रुपये लगााये हैं और यह स्कीम 2 फीसदी टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) के दायरे में आती है, तो म्युचुअल फंड कंपनी आपसे साल में 2000 रुपये फीस के रूप में लेगी। पहले म्युचुफंड कंपनियां इस मद में अपने हिसाब से फीस वसूलती थीं। लेकिन अब सीमा तय हो जाने के बाद निवेशकों से मनमानी फीस नहीं वसूली सकेंगी।

म्युचुअल फंड कंपनियां टोटल एक्सपेंस रेश्यो की वसूली निवेशक के निवेश से करती हैं। यह पैसा कंपनियां तब भी काटती हैं, जब आपकी म्यूचुअल फंड स्कीम ने अच्छा प्रदर्शन न किया हो। इस बात तो इस तरह से समझा जा सकता है कि अगर आपने किसी म्युचुअल फंड की स्कीम में 1 लाख रुपये लगाया है और वह 2 फीसदी टोटल एक्सपेंस रेश्यो के दायरे में आती है। 1 साल में अगर इस स्कीम ने 2 फीसदी का रिटर्न दिया तो निवेशक के फंड की वैल्यू 102000 रुपये होगी। लेकिन अब कंपनी इस रिटर्न पर टोटल एक्सपेंस रेश्यो वसूलेगी और यह 2000 रुपये होगा। इस प्रकार निवेशका का निवेश 1 लाख रुपये ही रह जाएगा और 2 हजार रुपये म्युचुअल फंड कंपनी टोटल एक्सपेंस रेश्यो के रूप में काट लेगी।

टोटल एक्सपेंस रेश्यो से होने वाली कमाई से म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने कई खर्च चलाती हैं। जैसे म्युचुअल फंड हाउस में काम करने वाली टीम का वेतन, शेयर खरीदने और बेचने से लेकर कार्यालयों तक के खर्च शामिल होते हैं। वहीं म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रचार प्रसार का खर्च तक।

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