Anand Mahindra के परिवार के बारे में कितना जानते हैं आप? पिता भी थे कामयाब Businessman

नई दिल्ली, सितंबर 04। आनंद महिंद्रा देश के जाने-माने एक अरबपति व्यवसायी हैं और मुंबई स्थित समूह महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन हैं। उनका जन्म 1 मई 1955 को हुआ था। 67 वर्षीय आनंद महिंद्रा का महिंद्रा ग्रुप एयरोस्पेस, कृषि व्यवसाय, आफ्टरमार्केट, ऑटोमोटिव, कंपोनेंट, निर्माण उपकरण, रक्षा, ऊर्जा, कृषि उपकरण, वित्त और बीमा, औद्योगिक उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, लीजर और हॉस्पिटेलिटी, रसद, रियल एस्टेट और रिटेल क्षेत्र में काम करता है। आनंद महिंद्रा काफी मशहूर हैं, क्योंकि वे ट्विटर पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। मगर क्या आप उनके परिवार के बारे में जानते हैं? आज जानिए उनके परिवार के बारे में।

दादा भी थे बिजनेसमैन

दादा भी थे बिजनेसमैन

आनंद महिंद्रा महिंद्रा एंड महिंद्रा के सह-संस्थापक जगदीश चंद्र महिंद्रा के पोते हैं। जगदीश चंद्र, एक भारतीय उद्योगपति, ने 1945 में कैलाश चंद्र महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्मद के साथ महिंद्रा एंड महिंद्रा की स्थापना की थी। आज उनकी विरासत को आनंद महिंद्रा संभाल रहे हैं।

पिता भी रहे सफल कारोबारी

पिता भी रहे सफल कारोबारी

आनंद महिंद्रा का जन्म मुंबई में हुआ था। उनके पिता हरीश महिंद्रा भी अपने पिता जगदीश चंद्र महिंद्रा की तरह एक सफल उद्योगपति रहे। आनंद महिंद्रा की मां इंदिरा महिंद्रा एक गृहिणी थीं। अरबपति कारोबारी आनंद महिंद्रा के दो भाई-बहन हैं। उनके नाम हैं अनुजा शर्मा और राधिका नाथ।

क्या करतीं हैं पत्नी

क्या करतीं हैं पत्नी

आनंद महिंद्रा की पत्नी अनुराधा महिंद्रा हैं। अनुराधा पेशे से एक पत्रकार हैं। वे महिलाओं के लिए जीवन शैली पत्रिका वर्व की संस्थापक, संपादक और प्रकाशक हैं। वह मैन्स वर्ल्ड की संपादक भी हैं। उनकी दो बेटियां हैं। दिव्या और आलिका।

दौलत और शिक्षा

दौलत और शिक्षा

आनंद महिंद्रा लॉरेंस स्कूल, लवडेल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में फिल्म निर्माण और आर्किटेक्चर की पढ़ाई की और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए पूरा किया। आज उनकी संपत्ति 230 करोड़ डॉलर है।

महिंद्रा ग्रुप में शुरुआत

महिंद्रा ग्रुप में शुरुआत

आनंद महिंद्रा ने अपने करियर की शुरुआत महिंद्रा ग्रुप की कंपनी महिंद्रा यूजीन स्टील कंपनी लिमिटेड के साथ की थी। वे फाइनेंस डायरेक्टर के कार्यकारी सहायक के रूप में कंपनी से जुड़े थे। सालों बाद वे उसी कंपनी के अध्यक्ष और उप प्रबंध निदेशक बने।

2012 रहा अहम साल

2012 रहा अहम साल

अगस्त 2012 में वह अपने चाचा केशुब महिंद्रा के पद छोड़ने के बाद महिंद्रा समूह के बोर्ड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बने। फिर चार साल बाद, उन्हें महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में फिर से नामित किया गया और महिंद्रा समूह के अध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया।

चैरिटी में भी आगे

चैरिटी में भी आगे

आनंद ह्यूमैनिटीड के अध्ययन के पैरोकार हैं क्योंकि उनका मानना है कि यह दुनिया में अंतर-निर्भरता के कारण उत्पन्न होने वाली विभिन्न समस्याओं का समाधान करने में मदद कर सकता है। उन्होंने हार्वर्ड ह्यूमैनिटी सेंटर को सपोर्ट करने के लिए 10 मिलियन डॉलर का दान भी दिया। इस दान की मान्यता में, केंद्र का नाम बदलकर हार्वर्ड में महिंद्रा ह्यूमैनिटीज सेंटर कर दिया गया। वह नन्ही कली परियोजना के संस्थापक हैं जिसका उद्देश्य भारत में वंचित लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है। सितंबर 2017 तक, इस परियोजना ने 130,000 वंचित लड़कियों को सपोर्ट किया। आनंद नंदी फाउंडेशन के आजीवन अध्यक्ष और निदेशक मंडल में से एक हैं, जो एक भारतीय धर्मार्थ ट्रस्ट है जो भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में काम करता है।

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