कोरोना वायरस ने न केवल भारत की बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर रखी है। भारत में इसका असर बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ा है।
नई दिल्ली: कोरोना वायरस ने न केवल भारत की बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर रखी है। भारत में इसका असर बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ा है। हालांकि अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार समेत बैंक कई महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने ग्राहकों को बड़ी खुशखबरी दी है। लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच बैंक ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत देकर उनपर कर्ज के बोझ को कम किया है। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने कहा कि वह 10 जून से अपनी फंड की मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड इंटरेस्ट रेट (एमसीएलआर) में कटौती करेगा। बता दें कि एसबीआई ने लगातार 13वीं बार एमसीएलआर में कटौती किया है। SBI से लें आसान शर्तों पर Gold लोन, जानें लेने का तरीका ये भी पढ़ें
अब 7% हो गया एमसीएलआर
एसबीआई ने सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नई दरें 10 जून 2020 से लागू हो जाएंगी। एसबीआई ने मॉजिर्नल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स (एमसीएलआर) में 25 आधार अंक यानी 0.25 फीसदी की कटौती की है। इसके बाद एक साल का एमसीएलआर घटकर 7 फीसदी हो गया है। इसके साथ ही, एसबीआई ने बेस रेट में भी 75 आधार अंकों की कटौती किया है। एसबीआई ने एक बयान में बताया कि इस कटौती के बाद बेस रेट 8.15 फीसदी से घटकर 7.40 फीसदी हो गया है। इसे भी 10 जून से लागू कर दिया जायेगा।
बैंक ने इन दरों में भी कटौती
बैंक ने बताया कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में 40 आधार अंकों की कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को दिया जाएगा। आरबीआई ने बीते 22 मई को ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया था। एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (ईबीआर) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (आरएलएलआर) भी 40 आधार अंक घट जाएगा। ईबीआर मौजूदा 7.05 फीसदी से घटकर 6.65 फीसदी और आरएलएलआर मौजूदा 6.65 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो जाएगा। बैंक ने बताया कि ईबीआर को 1 जुलाई से लागू कर दिया जाएगा। जबकि आरएलएलआर को 1 जून से लागू कर दिया गया है।
जानिए कितनी घटेगी आपकी ईएमआई
एसबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती का फायदा लोन लेने वाले ग्राहकों कम ईएमआई के रूप में मिलेगा। अगर किसी ग्राहक ने एसबीआई से 30 साल के लिए 25 लाख रुपये का लोन लिया है तो एमसीएलआर में कटौती से प्रति महीने 421 रुपये कम ईएमआई देनी होगी। इसी प्रकार अगर किसी ग्राहक ने ईबीआर /आरएलएलआर लिंक्ड लोन लिया है तो उनकी ईएमआई प्रति महीने 660 रुपये तक घट जाएगी।
क्या होता है एमसीएलआर
बैंकों के लिए लेंडिंग इंटरेस्ट रेट तय करने के फॉर्मूले का नाम मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड लेंडिंग रेट है। आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए तय फॉर्मूला फंड की मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित है। इस फॉर्मूले का उद्देश्य कस्टमर को कम इंटरेस्ट रेट का फायदा देना और बैकों के लिए इंटरेस्ट रेट तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
इन बैंकों ने भी दी लोन पर राहत
रिजर्व बैंक ने 22 मई को रीपो रेट में 0.40 प्रतिशत की कटौती कर उसे 4 प्रतिशत कर दिया था। उसके बाद ही स्टेट बैंक ने बाह्य मानकों से जुड़ी कर्ज की ब्याज दर और रीपो रेट से जुड़े कर्ज की दर में यह कटौती की। पंजाब नैशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक जैसे कुछ अन्य बैंकों ने भी रीपो रेट और एमसीएलआर से जुड़ी ब्याद दरों में कटौती की है। स्टेट बैंक ने अपनी आधार दर को 0.75 बेसिस पॉइंट घटाकर 7.40 प्रतिशत कर दिया। पहले यह 8.15 प्रतिशत पर थी। यह कटौती 10 जून से प्रभावी होगी।


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