नई दिल्ली, जुलाई 07। देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा के सीईओ और को-फाउंडर नितिन कामत का कहना है कि शेयर बाजार की तरह रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज में भी इन्वेस्ट करना रिस्की हो सकता है। कामत का मानना है कि मेट्रो शहरों के दूर बाहरी इलाके या छोटे शहरों कस्बों में प्रॉपर्टी खरीदना एक स्मॉल-मार्केट कैप की शेयर खरीदने के बराबर है। नितिन ने कहा है कि अक्सर लोग इन प्रॉपर्टीज से उम्मीद करते हैं कि भविष्य में यह निवेश बहुत अधिक रिटर्न देगा।
कब रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए
नितिन कामत ने बताया कि हमेशा निवेशकों को प्रॉपर्टी का यील्ड निकाल के ही रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए। नितिन निवेशकों से एक कार्यक्रम में बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यील्ड कैलकुलेट करने का फार्मूला भी बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को हमेशा यह जान लेना चाहिए की प्रॉपर्टी की ग्रोथ दर महंगाई दर से अधिक है। उन्होने बताया कि कोई भी आसानी से रियल एस्टेट के प्रॉपर्टी का यील्ड निकाल सकता है, इसका फार्मूला है '( किराया - ब्याज - रखरखाव लागत)/ कुल लागत) ' इस कैलकुलेशन की जो वैल्यू प्रतिशत में आती है उसे प्रॉपर्टी का यील्ड कहा जाता है। कामत ने कहा कि अगर यील्ड महंगाई दर से कम है तो आपको वहा के रियल एस्टेट में निवेश नहीं करना चाहिए। आप रियल एस्टेट में निवेश तभी करें जब प्रापर्टी हर 7 साल में दोगुनी हो जाए।
रियल एस्टेट में भी है जोखिम
नितिन कामत ने कहा कि प्राइवेट मार्केट के वैल्यूएशन के जैसे ही ही रियल एस्टेट में निवेश भी इलिक्विड है। जेरोधा के को-फाउंडर के मुताबिक प्रॉपर्टी की लास्ट बाइंग प्राइस और उसकी आज की वैल्यू में अन्तर कभी भी कम हो सकता है। शहर से दूर और छोटे शहरों के प्रॉपर्टीज दूसरा जोखिम यह है कि खरीदने से पहले कीमत तय रहता हैं और एडवांस भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में आप दामों के उतार चढ़ाव का फायदा नहीं उठा पाएंगे।
टियर 2 या 3 शहरों में है अवसर
उन्होंने कहा कि टियर 2 और 3 के शहरों में रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करना फायदेमंद हो सकता है। इन शहरों में कीमत अभी स्थिर बनी हुई है और इन शहरों का विकास भी निरंतर हो रहा है। लेकिन शहरों और कस्बों में निवेश करना पैसा फसाने जैसा है। छोटे कस्बों या शहरों में अभी ग्रोथ रेट बहुत कम हैं और इसमें बहुत समय लग सकता है।


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