नई दिल्ली। कोरोना महामारी के देश में लॉकडाउन करना पड़ा है। इससे आर्थिक गतिविधियां एकदम ठप सी हो गई हैं। इससे ऊबरने में समय लगेगा। दूसरी तरफ डिमांड के मुकाबले अधिक मात्रा में घर बनने के बावजूद घरों और फ्लैटों की कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण स्थितियां बदल सकती है। घरों और फ्लैटों के दाम कम हो सकते हैं। लॉकडाउन के बाद बाजार में मंदी की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, लिहाजा घर की कीमतें नीचे आने की उम्मीद है।

निर्माण क्षेत्र से संबंधित कंपनी 99 एकर्स डॉटकॉम ने दिल्ली (एनसीआर), हैदराबाद, बंगलुरू, पुणे, चेन्नई, चंडीगढ़, अहमदाबाद और लखनऊ में एक सर्वेक्षण किया है। इसमें घर खरीदने के इच्छुक 1761 लोगों से जानकारी प्राप्त की गई है। इस सर्वेक्षण में शामिल हुए करीब 90 प्रतिशत लोगों का मानना है कि लॉकडाउन के पश्चात घर की कीमतें जरूर नीचे आएंगी। इसलिए इसमें से 40 प्रतिशत लोगों ने घर खरीदने की अपनी योजना को अनिश्चित समय के लिए होल्ड पर डाल दिया है। हालांकि बाकी के 60 प्रतिशत लोग आने वाले 1 साल के अंदर ही घर खरीदना चाहते हैं।
यह सर्वेक्षण घरों की मांग, निवेश क्षमता, घरों की कीमतों के बारे उनकी अपेक्षा और इस क्षेत्र में आये हुए नये रुझानों के आधार पर किया गया है। निर्माण क्षेत्र में फिलहाल पैदा हुई अनिश्चितता और लिक्विडिटी के अभाव के चलते घरों की खरीदी को होल्ड कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में घर खरीदने की तुलना में तैयार घरों की खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित है, ये अभिप्राय सर्वेक्षण में शामिल 85 प्रतिशत लोगों ने व्यक्त किया है।
सर्वेक्षण में शामिल हुए लोगों के निवेश के विविध प्रकार के रुझानों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की गई। उसके अनुसार सबसे अधिक 31 प्रतिशत सहभागियों ने रियल इस्टेट में निवेश को प्राथमिकता दी है। वहीं 24 प्रतिशत लोगों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और सोने की खरीदारी पर विश्वास जताया है जबकि 21 प्रतिशत लोगों ने शेयर बाजार में निवेश करने में रुचि दर्शाई है।
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