India's First Budget: आज भारत का बजट 50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का हो चुका है। यह आंकड़ा सुनकर गर्व होता है, लेकिन इस ऊंचाई तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। आजादी के बाद भारत ने आर्थिक रूप से बहुत छोटे कदमों से शुरुआत की थी। उस दौर का बजट जानकर आज की पीढ़ी हैरान रह सकती है।

बजट क्यों होता है इतना अहम
हर साल सरकार बजट के जरिए यह तय करती है कि देश का पैसा कहां से आएगा और कहां खर्च होगा। इसी से तय होता है कि टैक्स कितना होगा, योजनाओं पर कितना पैसा लगेगा और विकास की रफ्तार कैसी रहेगी। आज बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि आम आदमी की जिंदगी से सीधे जुड़ा दस्तावेज बन चुका है।
आजादी से पहले भी बनता था बजट
बहुत कम लोगों को पता है कि भारत में बजट पेश करने की परंपरा आजादी से पहले शुरू हो चुकी थी। अंग्रेजी शासन के दौरान बजट बनाया जरूर जाता था, लेकिन उसका मकसद भारतीय जनता नहीं थी। उस समय बजट का इस्तेमाल शासन चलाने और रेवेन्यू इकट्ठा करने के लिए किया जाता था।
आजाद भारत का पहला बजट कब आया
भारत के आजाद होने के कुछ महीनों बाद 26 नवंबर 1947 को पहला केंद्रीय बजट पेश किया गया। उस समय देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी थे। यह बजट ऐसे समय में आया जब देश बंटवारे के दर्द से गुजर रहा था। लाखों लोग बेघर हो चुके थे और सरकारी व्यवस्था नई-नई बनी थी।
पूरे साल का नहीं था पहला बजट
दिलचस्प बात यह है कि भारत का पहला बजट पूरे साल के लिए नहीं था। यह सिर्फ कुछ महीनों के लिए तैयार किया गया था, क्योंकि देश को आर्थिक स्थिरता बनाने में समय लग रहा था।
पहले बजट के छोटे लेकिन अहम आंकड़े
आज जहां बजट लाखों करोड़ में है, वहीं पहले बजट में सरकार की कुल आमदनी करीब 171 करोड़ रुपए के आसपास थी। खर्च इससे ज्यादा रखा गया था, जिससे साफ था कि देश को शुरुआत में घाटे का सामना करना पड़ेगा। हालांकि यह घाटा मजबूरी था, क्योंकि देश को दोबारा खड़ा करना सबसे बड़ी जरूरत थी।
रक्षा और सुरक्षा पर खास ध्यान
पहले बजट में सबसे ज्यादा पैसा सुरक्षा से जुड़े कामों पर खर्च किया गया। नई सीमाओं की रक्षा और आंतरिक स्थिरता उस समय सरकार की पहली प्राथमिकता थी।
बदलते समय के साथ बदला बजट
1947 के उस छोटे बजट से लेकर आज तक भारत ने लंबा सफर तय किया है। अब बजट में शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, डिजिटल सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जाता है। भारत का बजट अब सिर्फ खर्च की लिस्ट नहीं बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज बन गया है।


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