नई दिल्ली, जुलाई 14। वेदांत समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने 1050 फीसदी या 21 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम लाभांश (इंटरिम डिविडेंड) का भुगतान करने के लिए 21 जुलाई की रिकॉर्ड तारीख तय की है। बीएसई फाइलिंग के अनुसार कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए कुल लाभांश का भुगतान करने के लिए 8873.17 करोड़ रु निर्धारित किए हैं। ये एक गारंटीड कमाई का मौका है। आप भी कंपनी के शेयर खरीद कर लाभांश हासिल कर सकते हैं।
क्या है कंपनी का बिजनेस
हिंदुस्तान जिंक जिंक-लीड और सिल्वर की दुनिया का सबसे बड़ी और भारत की एकमात्र इंटीग्रेटेड उत्पादक है। अंतरिम लाभांश और रिकॉर्ड तिथि की घोषणा के तुरंत बाद, कंपनी के शेयर में तेजी देखी गयी है। आज कंपनी का शेयर करीब 5 फीसदी तेजी दिखा रहा है।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने दी मंजूरी
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने लाभांश के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी 2 रु प्रति फेस वैल्यू वाले शेयरों पर 21 रु या 1050 फीसदी का लाभांश देगी। कंपनी ने कहा है कि अंतरिम लाभांश का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाएगा।
कैसा है शेयर
शेयर का मौजूदा बाजार मूल्य 285.05 रुपये है। इसका 52 सप्ताह का उच्च स्तर 408.60 रुपये और 52 सप्ताह का निचला स्तर 242.05 रुपये है। पिछले एक महीने में शेयर ने 1.5% का रिटर्न दिया है। शेयर में आज करीब 5% की तेजी आई है। कंपनी की मजबूती में इसकी हाई इनकम और पूंजी पर हाई रिटर्न के साथ प्रोफिट में वृद्धि शामिल है।
कहां स्थित है कंपनी का हेडक्वार्टर
कंपनी का मुख्यालय राजस्थान राज्य में उदयपुर में है जहाँ इसकी जिंक-लीड खदानें और गलाने वाले कॉम्प्लेक्सेस हैं। हिंदुस्तान जिंक कैप्टिव थर्मल पावर प्लांट के साथ बिजली में आत्मनिर्भर है और पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करके इसने ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में प्रवेश किया है। कंपनी अपनी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, खनन और धातु कंपनियों के बीच 2020 में डॉव जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में एशिया-प्रशांत में प्रथम और विश्व स्तर पर 7वें स्थान पर है।
रिटर्न नहीं रहा खास
शेयर का रिटर्न निगेटिव रहा है। जैसे कि इसने 6 महीनों में 13.6 फीसदी का नुकसान कराया है। वहीं 2022 में अब तक यह 10.8 फीसदी और 1 साल में करीब 15 फीसदी नुकसान करा चुका है। 5 सालों में इसका रिटर्न केवल 4 फीसदी रहा है। नवंबर 2006 से शेयर बाजार में आने के बाद से इसने 209 फीसदी रिटर्न दिया है। कंपनी की मार्केट कैपिटल इस समय 1.20 लाख करोड़ रु है। पहले यह एक केंद्रीय सरकारी कंपनी थी, जिसे भारत सरकार द्वारा वेदांत लिमिटेड को तब बेचा गया था जब अटल बिहारी वाजपेयी और भारतीय जनता पार्टी की सरकार वर्ष 2003 में सत्ता में थी। ये एक 56 साल पुरानी कंपनी है। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को 10 जनवरी 1966 को मेटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नाम से एक सरकारी कंपनी के रूप में शुरू किया गया था। मगर ये घाटे में थी। इसलिए 2001 में, घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों (सरकारी कंपनियों) के सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के तहत कंपनी को बिक्री के लिए रखा गया था।


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