अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदानी ग्रुप को लेकर और बड़ा दावा किया है. माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर साझा किए रिपोर्ट में मार्केट रेगुलेटर SEBI के चेयरपर्सन पर बड़ा दावा किया है. अमेरिकी कंपनी ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति पर अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल से जुड़ी ऑफशोर संस्थाओं में हिस्सेदारी रखने का आरोप लगाया है.
आरोपों के मुताबिक कथित तौर पर विनोद अडानी के कंट्रोल वाले ये फंड बरमूडा और मॉरीशस में स्थित हैं, जोकि कथित तौर पर फंड्स में हेराफेरी करने और स्टॉक की कीमतों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए थे. हिंडनबर्ग रिसर्च के दावे पर SEBI चेयरपर्सन बुच और उनके पति ने इन आरोपों का खंडन किया है. साथ ही कहा है कि वे जल्द ही इन आरोपों पर डीटेल जवाब देंगे.
SEBI चेयरपर्सन पर क्या है कथित आरोप?
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि माधबी पुरी बुच और उनके पति ने विनोद अडानी के इस्तेमाल किए जाने वाले उन्हीं ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी छिपाई थी. उन्होंने कथित तौर पर 2015 में सिंगापुर में IPE प्लस फंड 1 के साथ एक खाता खोला, जिसमें निवेश के सोर्स के तौर पर "सैलरी" को लिस्ट किया गया. बुच और उनके पति की कुल संपत्ति का अनुमान 10 मिलियन डॉलर लगाया गया है. इसके अलावा बुच के पति ने कथित तौर पर सेबी अध्यक्ष के रूप में बुच की नियुक्ति से कुछ हफ़्ते पहले ग्लोबल डायनेमिक ऑपर्च्युनिटीज फंड में अकाउंट को ऑपरेट करने के लिए एकमात्र प्राधिकरण का अनुरोध किया.

प्राइवेट ईमेल के गलत इस्तेमाल के आरोप
रिपोर्ट में आगे आरोप लगाया गया है कि SEBI के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, बुच ने फंड में यूनिट्स को भुनाने के लिए अपने प्राइवेट जीमेल अकाउंट का इस्तेमाल किया. हिंडेनबर्ग को संदेह है कि अडानी ग्रुप के शेयरहोल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई करने में SEBI की अनिच्छा विनोद अडानी के समान फंडों में बुच की भागीदारी से उपजी हो सकती है.
बता दें कि जनवरी 2023 में, हिंडनबर्ग ने अदानी समूह पर कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे बड़े घोटाले में से एक को अंजाम देने का आरोप लगाया था. इसके मुताबिक अडानी ग्रुप ने रेवेन्यू बढ़ाने और स्टॉक की कीमतों में हेरफेर करने के लिए बोगज कंपनियों का इस्तेमाल किया. इससे ग्रुप के शेयर प्राइसेज में तेज गिरावट आई. हालांकि, ज्यादातर नुकसान की भरपाई हो चुकी है.
बुच की ऑफशोर कंसल्टिंग फर्म
रिपोर्ट में बुच के पास सिंगापुर की एक ऑफशोर कंसल्टिंग फर्म अगोरा पार्टनर्स का ओनरशिप भी शामिल है. जबकि वह SEBI में पूर्णकालिक सदस्य थीं. उल्लेखनीय है कि सेबी अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के 2 हफ्ते बाद उन्होंने इस फर्म के शेयर अपने पति को ट्रांसफर कर दिए.
इन खुलासों के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को अपनी जांच पूरी करने और रेगुलेटरी खामियों की जांच के लिए एक स्पेशल पैनल बनाने का निर्देश दिया. हालांकि, इस स्पेशल पैनल को अडानी के बारे में कोई निगेटिव रिजल्ट नहीं मिला। नतीजतन, सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि सेबी के अलावा किसी और जांच की जरूरत नहीं है.
हिंडनबर्ग रिसर्च का सुझाव है कि बुच का अदानी के साथ रिश्ता शायद रेगुलेटरी जांच से बचने में उनके आत्मविश्वास को समझा सकता है. इन गंभीर आरोपों के बावजूद, बुच और उनके पति दोनों ही अपनी बेगुनाही पर कायम हैं. साथ ही इन दावों को संबोधित करते हुए एक व्यापक बयान जारी करने की योजना बना रहे हैं.
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