Chanda Kochhar : स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आज 3 हजार 250 करोड़ रु के लोन फ्रॉड मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत और अन्य के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया और इन सभी आरोपियों को समन जारी किया। इस मामले की सुनवाई आज यानी 2 अगस्त 2023 को होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चार्जशीट में सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि आईसीआईसीआई बैंक के एमडी और सीईओ के रूप में चंदा कोचर की नियुक्ति के ऐलान के बाद आरोपियों ने आर्थिक रूप से संकटग्रस्त वीडियोकॉन ग्रुप को लोन स्वीकृत कराने के लिए उनके साथ साजिश रची।

कोचर की कंपनी मेसर्स न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स लिमिटेड में इन्वेट्समेंट की आड़ में पेमेंट लिए गए 64 करोड़ रु की अवैध संतुष्टि के बदले वक्त-वक्त पर दिए गए।
सीबीआई ने दावा किया है कि चर्चगेट का एक डिपार्टमेंट जहां कोचर दंपत्ति रह रहे थे। जो प्रलोभन में से एक था। सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि करीब इतने ही क्षेत्रफल का एक फ्लैट इस सोसायटी में वर्ष 2014 में 16 करोड़ रु में बेचा गया था और वर्ष 2017 में 18.5 करोड़ रु में बेचा गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अक्टूबर 2016 में जबकि चंदा कोचर ने फ्लैट को सिर्फ 11 लाख रु में ट्रांसफर करवा लिया था। चार्जशीट में कहा गया है कि इस बात का उल्लेख करना सार्थक है कि उनके बेटे अर्जुन ने 19.1 करोड़ रुपये में 12 नवंबर, 2021 को उसी मंजिल पर समान क्षेत्र का एक फ्लैट खरीदा था।
सीबीआई की तरफ से दावा किया गया है कि उसकी जांच से यह पता चलता है कि सीसीआई चैंबर्स में कोचर का अपार्टमेंट संबंधित अवधि के दौरान वीडियोकॉन के स्वामित्व में था। जब वीडियोकॉन के कई लोन ले प्रस्ताव बैंक में विचाराधीन थे। तब दीपक कोचर ने धूत के साथ साजिश करके क्वालिटी एप्लायंस के शेयर सिर्फ 11 लाख रुपये में खरीदे।
मई 2009 में कोचर के सीईओ की भूमिका संभालने के बाद सीबीआई की तरफ से कहा गया कि वीडियोकॉन को 6 रूपी-टर्म लोन दिए गए। इन सभी को बैंक की क्रेडिट नीति के उल्लंघन में कोचर की अध्यक्षता वाली निदेशकों की समिति द्वारा मंजूरी दी गई थी।
चार्जशीट में वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के भतीजे सौरभ का भी नाम है और एक सीए दत्तात्रय कदम का भी नाम है। इसमें वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और न्यूपावर रिन्यूएबल्स लिमिटेड नाम की कंपनियां हैं।
सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि दीपक कोचर न्यूपावर रिन्यूएबल्स के निदेशक थे। उन्होंने धूत से 20 अगस्त 2009 को 64 करोड़ रुपये का चेक स्वीकार किया।
यह चेक 26 अगस्त, 2008 को चंदा कोचर की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा सुप्रीम वीडियोकॉन ग्रुप की एक नॉन बिजनेस एंटिटी, गैर-व्यावसायिक इकाई, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के पक्ष में 300 करोड़ रु की राशि का लोन एक्सेप्ट करने के बाद आया था।
सीबीआई की तरफ से आरोप लगाया गया है कि वेणुगोपाल धूत ने अन्य आरोपियों के साथ क्रिमिनल साजिश में बैंक को आश्वस्त किया कि लोन का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर में किया जाएगा लेकिन लोन की राशि को डाइवर्टेड कर दिया गया।
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