नई दिल्ली। आर्थिक दिक्कतों को झेल रही भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के करीब आधे कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया है। कंपनी में लागू की गई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के तहत एक हफ्ते के अंदर ही करीब 70,000 हजार कर्मचारियों ने आवेदन कर दिया है। एक हफ्ते पहले लागू की गई यह वीआरएस स्कीम 3 दिसंबर 2019 तक लागू है। अगर अन्य कर्मचारी चाहें तो 3 दिसंबर तक वीआरएस लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीएसएनएल में इस समय करीब 1.5 लाख् कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी की आर्थिक दिक्कतें इतनी बढ़ गई हैं कि कई महीने तो कर्मचारियों को वेतन ही नहीं मिल पाता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए ज्यादा-ज्यादा कर्मचारी वीआरएस का लाभ लेकर नौकरी छोड़ने का फैसला कर रहे हैं।
अभी और कर्मचारी कर सकते हैं आवेदन
बीएसएनएल को उम्मीद है कि करीब 80,000 तक कर्मचारी वीआरएस का लाभ लेंगे, जिससे कंपनी को हर साल करीब वेतन के रूप में 7000 करोड़ रुपये की बचत होगी। इस वीआरएस योजना का फायदा 50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारी ले सकते हैं। कंपनी 50 साल से ज्यादा के कर्मचारियों को स्वेच्छा से वीआरएस लेने का विकल्प दे रही है, ताकि कर्मचारियों की घटाकर लागत घटाई जा सके। केन्द्र सरकार बीएसएनलए को वीआरएस सेटलमेंट के लिए 17,160 करोड़ रुपये और 12,768 करोड़ रुपये रिटायरमेंट लायबिलिटी के लिए मदद के रूप में दे ही है।
ज्यादातर कमाई खा जाते हैं कर्मचारी
जहां बीएसएनएल में करीब 1.5 लाख कर्मचारी काम करते हैं, वहीं एमटीएनएल में करीब 22,000 कर्मचारी काम करते हैं। बीएसएनएल के कर्मचारियों पर कंपनी की कुल आय का 75 फीसदी हिस्सा खर्च करती है, तो एमटीएनएल की कुल आय का 80 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों पर खर्च हो जाता है। इसे ही देखते हुए यह वीआरएस लागू किया गया है। इसके बाद कंपनी सही साइज में आ जाएगी और इसे फायदे में लाया जा सकेगा।
सरकार ने दिया पैकेज
केन्द्र सरकार ने पिछले महीने ही घाटे में चल रही बीएसएनएल और एमटीएनएल के रिवाइवल के लिए 69,000 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इसमें घाटे में चल रहीं इन दोनों कंपनियों के विलय के अलावा उनके संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन के अलावा कर्मचारियों को वीआरएस दिया जाना भी इसमें शामिल है।


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