नई दिल्ली। चीन की बढ़ती दादागिरी से परेशान कंपनियों ने अब तेजी से निकलने का फैसला कर लिया है। यह कंपनियां पूरी दुनिया में जा रही हैं। इन कंपनियों को रिझाने की कोशिशों में देश की सरकार के साथ-साथ राज्यों की सरकारें भी लगी हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश को बड़ी सफलता मिली है। चीन में काम कर रही करीब आधा दर्जन कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की इच्छा जताई है। फिलहाल यूपी में योगी सरकार जापानी कंपनियों को निवेश के लिए लगातार प्रयास कर रही थी। इसके लिए सरकार ने एक अलग से जापनी डेस्क भी बनाया था। कोरोना वायरस के इस दौर में जहां रोजगार की संभावना बढ़ेगी, वहीं हिचकोले खा रही अर्थव्यवस्था को भी संभलने की उम्मीद जग गई है।
इन कंपनियों ने जताई इच्छा
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की मेहनत सफल होती लग रही है। जापान की आधा दर्जन ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जताई है। जिसमें मियाची कॉर्प और टोकाची कॉर्प जैसी कंपनियां शामिल हैं। यहा जानकारी हाल ही में मीडिया में आई है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से छपी जानकारी के अनुसार इस निवेश के प्रस्ताव में हाई एंड टेक्नॉलजी के साथ राज्य में 5 मछली हैचरी बनाना, सिंचाई के लिए 10 मेगावाट का सोलर पार्क लगाना और कृषि संसाधन पार्क बनाना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
चल रही है लगातार बात
ये प्रस्ताव प्रदेश के एमएसएमई, इन्वेस्टमेंट और एक्सपोर्ट प्रमोशन मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और जापानी कंपनियों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस में बातचीत में सामने आए हैं। इस कॉन्फ्रेंस में जापान में भारतीय राजदूत संजय वर्मा भी शामिल हुए।
हाथो-हाथ जमीन देने का तैयार
उत्तर प्रदेश सरकार जापानी कंपनियों को अपने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध जीआईएस मैप की गई 1 लाख एकड़ जमीन के साथ-साथ एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी मुहैया करा रही है। मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के चलते जो कंपनियां चीन से अपना काम समेट रही हैं। हम उन सभी देशों की मल्टी नेशनल कंपनियों को अपनी ओर निवेश करने के लिए खींच रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमें आज जापानी कंपनियों से ठोस प्रस्ताव मिले हैं। राज्य सरकार अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए गंभीरता पूर्वक विचार कर रही है।


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