GST Reform Impact On GST Collection : देश में जीएसटी यानी गुड एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा रिफॉर्म किया गया है। बीते दिन बुधवार (3 सितंबर) को देर रात तक चली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में टैक्स स्लैब को कम करने का एतिहासिक फैसला किया गया।
बैठक का नेतृत्व कर रहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब 5% और 18% रहेंगे। इसके साथ अब 12 फीसदी और 18 फीसदी के टैक्स स्लैब को हटा दिया गया है। हालांकि, हानिकारक और सुपर लग्जरी आइटम्स के लिए एक स्पेशल 40% का स्लैब जरूर रखा गया है। टैक्स स्लैब में संशोधन 22 सितंबर से देशभर में लागू होंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते 15 अगस्त को एतिहासिक लाल किले के प्राचीर से दिवाली से पहले लोगों को जीएसटी रिफॉर्म के तौर पर बड़ा गिफ्ट देने का ऐलान किया था।
इन सबके बीच देश में हुए सबसे बड़े जीएसटी रिफॉर्म से जीएसटी कलेक्शन को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं। यानी सबसे अहम सवाल यह है कि जीएसटी रिफॉर्म से सरकार का खजाना भरेगा या उसमें कमी आएगी, क्योंकि कई ऐसी वस्तु और सेवाएं हैं जिनपर टैक्स जीरो कर दिया गया है। तो चलिए जीएसटी कलेक्शन के हिस्ट्री को जानते हुए आंकड़ों के साथ यह समझने का प्रयास करते हैं...
कब लागू हुआ था GST?
देश में टैक्स सुधार की दिशा में 2017 में एक एतिहासिक फैसला लिया गया था और तमाम तरह के टैक्सों को खत्म कर GST (Good And Service Tax) को लागू किया गया था। 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू GST को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा टैक्स माना गया है।
इस व्यवस्था के लागू होते ही पहले लगने वाले अलग-अलग तरह के तमाम टैक्स खत्म कर दिए गए थे। हालांकि जीएसटी को लेकर चर्चा की शुरुआत करीब 40 साल पहले हुई थी। जीएसटी परिषद (GST Council) में केंद्रीय वित्त मंत्री, राज्य मंत्री (रेवेन्यू) और राज्यों के वित्त मंत्रियों को जगह दी गई है।
GST का इतिहास : देखें पूरी टाइमलाइन
1986-87 : राजीव गांधी सरकार में वित्त मंत्री वी.पी. सिंह ने मॉडवेट (MODVAT) लागू किया, जिससे करों के दोहरी व्यवस्था से राहत मिली।
1994-95: उदारीकरण के दौर में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने सेवा कर (Service Tax) लागू किया।
1999-2000: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने GST का विचार सामने रखा और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में समिति बनाई।
2006: वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 2010 तक GST लागू करने की घोषणा की, हालांकि समय सीमा आगे बढ़ गई।
2009: समिति ने पहला चर्चा पत्र (Discussion Paper) जारी किया।
2011: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने GST पर संविधान संशोधन विधेयक (115वां) संसद में पेश किया, लेकिन यह लोकसभा भंग होने के कारण लंबित रह गया।
2014-16: नई सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 122वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। यह 2016 में संसद से पारित हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 101वां संविधान संशोधन अधिनियम बन गया।
2016: GST काउंसिल का गठन हुआ, जिसने कर दरें और ढांचा तय किया।
2017: संसद ने चार प्रमुख विधेयक केंद्रीय GST (CGST), एकीकृत GST (IGST), केंद्र शासित प्रदेश GST (UTGST) और राज्यों को क्षतिपूर्ति बिल पारित किए।
जीएसटी को 4 भागों में बांटा गया
पहला: सीजीएसटी (केंद्रीय माल और सेवा कर)
दूसरा: एसजीएसटी (राज्य माल और सेवा कर)
तीसरा: आईजीएसटी (एकीकृत माल और सेवा कर)
चौथा: यूटीजीएसटी (केंद्र शासित प्रदेश माल और सेवा कर)
जीएसटी कलेक्शन ने रचा इतिहास
जीएसटी की व्यवस्था लागू होने के बाद से लगातार सरकार की आय बढ़ती चली गई और जीएसटी कलेक्शन के जरिए सरकार की कमाई में साल-दर-साल तगड़ा इजाफा देखने को मिला है। पिछले 8 साल में कमाई का आंकड़ा तीन गुना हो गया है।
जीएसटी से सरकार की कमाई की बात करें, तो 1 जुलाई 2017 को लागू होने के बाद से हर साल इसमें जबरदस्त इजाफा हुआ है और इस साल 2025 में जीएसटी कलेक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
सरकार के आंकड़ों पर नज़र डालें तो 2017-18 (जुलाई से मार्च तक) में इसके जरिए सरकारी खजाने में 7.41 लाख करोड़ रुपये आए थे। वहीं अगले साल 2018-19 में जीएसटी से कमाई का आंकड़ा 11.77 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 2019-20 में जीएसटी कलेक्शन 12.22 लाख करोड़ रुपये और 2020-21 में 11.37 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके बाद लगातार सरकार का खजाना भरता गया और 2021-22 से लेकर 2024-25 तक सिर्फ पांच साल में ही जीएसटी से सरकार की कमाई दोगुनी हो गई। 2021-22 में जीएसटी से सरकार की कमाई 14.83 लाख करोड़ रुपये से जबकि 2022-23 में 18.08 लाख करोड़ रुपये और 2023-24 में 20.28 लाख करोड़ जबकि 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये हो गई।

यानी यदि 2021-22 से लेकर 2024-25 तक देखें तो सिर्फ 5 साल में ही जीएसटी से सरकार की कमाई दोगुनी हो चुकी है और ये 11.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

जीएसटी कलेक्शन ने 2025 में बनाया सबसे बड़ा रिकॉर्ड
इस साल 2025 में जीएसटी कलेक्शन ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और एक नया रिकॉर्ड बनाया। अप्रैल 2025 में अब तक सबसे बड़ा मासिक जीएसटी कलेक्शन हुआ था, जो 2.37 लाख करोड़ रुपये रहा।
जनवरी 2025 में जीएसटी कलेक्शन 1.96 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि फरवरी 2025 में 1.84 लाख करोड़ रुपये, मार्च 2025 में 1.96 लाख करोड़ रुपये, अप्रैल 2025 में 2.37 लाख करोड़ रुपये, मई 2025 में 2.01 लाख करोड़ रुपये, जून 2025 में 1.85 लाख करोड़ रुपये, जुलाई 2025 में 1.96 लाख करोड़ रुपये और अगस्त 2025 1.86 लाख करोड़ रुपये रहा।

सरकार का खजाना भरेगा या कम होगी कमाई?
सरकार ने रोजमर्रा के सामानों साबुन, तेल, घी, फूड प्रोडक्ट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स (मक्खन, घी, पनीर, गाढ़ा/पनीर), चॉकलेट और कोको पाउडर, सिलाई मशीन, पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स, बिस्कुट, माल्ट एक्सट्रेक्ट (गैर-कोको) समेत जैम, जेली, मुरब्बा, मेवे/फलों का पेस्ट, सूखे मेवे, मेवे समेत पहले से पैक पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती, रोटी पर जीएसटी अब 5% कर दिया है जो पहले 12 फीसदी के स्लैब में था।
वहीं, छोटी कारों, 350 सीसी तक की बाइक्स से लेकर ट्रैक्टर तक पर जीएसटी घटाकर 28 से 18 फीसदी किया गया है , जिसका सीधा मतलब है कि इनके दाम घटने वाले हैं। इसके अलावा एयर कंडीशनर, डिशवाशर मशीनें, टीवी (एलईडी, एलसीडी), मॉनिटर, प्रोजेक्टर पर लागू 28% जीएसटी को कम कर 18% किया गया है।
इंश्योरेंस प्रीमियम और 33 जरूरी दवाओं के साथ ही शिक्षा से संबंधित सामानों को जीएसटी फ्री यानी जीरो जीएसटी कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को देखें तो इन सब सामानों पर होने वाले जीएसटी कलेक्शन पर फर्क जरूर पड़ेगा। हालांकि कितना पडेगा यह फिलहाल कहना मुश्किल है। नई दरें लागू होने के बाद आने वाले पहले जीएसटी कलेक्शन से यह स्पष्ट होगा कि सरकार को नुकसान हुआ या फायदा।
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