1 जनवरी से कपड़ा और परिधान पर बढ़ रहा GST, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली, दिसंबर 28। 1 जनवरी, 2022 से टेक्सटाइल वैल्यू चेन पर जीएसटी की 12 प्रतिशत की एक समान दर होगी। इस बात की जानकारी वित्त मंत्रालय ने 18 नवंबर को एक अधिसूचना में दी थी। इसके साथ ही कपड़े पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगा। साथ ही किसी भी मूल्य के परिधान पर भी जीएसटी 12 फीसदी ही लगेगा। जबकि पहले जब 1,000 रुपये तक की कीमत वाले परिधान पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था। इससे आम लोगों के लिए भी कपड़ा महंगा हो सकता है।

कपड़ा निर्माताओं को है दिक्कत

कपड़ा निर्माताओं को है दिक्कत

कपड़ा और परिधान निर्माताओं ने तैयार वस्त्र और परिधान उत्पादों पर जीएसटी दरों में बदलाव के जीएसटी काउंसिल के फैसले पर चिंता व्यक्त की है। कपड़ा उद्योग पर प्रस्तावित जीएसटी बढ़ोतरी के नतीजे में सभी वस्त्र और कपड़े महंगे हो जाएंगे। मगर इससे सालाना सरकारी राजस्व में अतिरिक्त 3 ट्रिलियन डॉलर आने की संभावना है। दरअसल खर्च की बढ़ती जरूरतों और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के आर्थिक प्रभाव के कारण, केंद्र और राज्य दोनों सरकारें राजस्व चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

केंद्र को होगा फायदा

केंद्र को होगा फायदा

इस टैक्स वृद्धि से केंद्र को सहायता मिलेगी, जो हाल ही में फ्यूल चार्ज में कटौती के नतीजे में राजस्व की कमी का सामना कर रही है। अगले साल जून में केंद्र सरकार का जीएसटी मुआवजा खत्म होने पर इससे राज्य सरकारें वित्तीय संकट से भी बच पाएंगी। केंद्र का एक और टार्गेट है इंवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करना क्योंकि मानव निर्मित फाइबर पर जीएसटी 18 फीसदी है।

80 फीसदी उत्पाद होंगे प्रभावित

80 फीसदी उत्पाद होंगे प्रभावित

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक अनुमान है कि सरकार के कपड़े पर जीएसटी बढ़ाने से उद्योग के 85% और लगभग 80% तैयार उत्पाद प्रभावित होंगे। इससे इस पूरे सेक्टर में 15 लाख से अधिक नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इसा तरह असंगठित क्षेत्र का देश में कपड़ा उत्पादन में 80% से अधिक का योगदान है। ऐसे में कपड़े पर जीएसटी को बढ़ाकर 12% करने से पावरलूम और हथकरघा बुनकरों को नुकसान होगा।

सस्ते कपड़े होंगे महंगे

सस्ते कपड़े होंगे महंगे

यार्न, पैकिंग सामग्री और माल ढुलाई जैसे कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मार्केट में कपड़ों की कीमतों में 15-20% की वृद्धि की संभावना है। व्यापारियों को इस बात चिंता है कि जो लोग 1,000 रुपये से कम के कपड़े खरीदते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोतरी भी सीमित हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई छोटे कारोबारी जो जीएसटी से पहले अनौपचारिक क्षेत्र में थे, वे वापस उसी स्टेटस में जा सकते हैं।

फैसला वापस मांग लेने की मांग

फैसला वापस मांग लेने की मांग

ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासंघ (कैट) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कपड़ा और जूते पर जीएसटी दर में वृद्धि को लागू करने को स्थगित करने का आग्रह किया है। वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कैट ने इस कदम को 'अतार्किक' और 'जीएसटी टैक्स ढांचे के सिद्धांत से परे' करार दिया। कैट ने कहा कि खासकर ऐसे समय में जब देश में घरेलू व्यापार भारी नुकसान से उबरने के कगार पर ये फैसला सही नहीं है। कैट के मुताबिक, कई सालों तक टेक्सटाइल या फैब्रिक पर कोई टैक्स नहीं लगता था।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+