GST : Flavoured milk दूध नहीं होता, देना होगा Tax

नई दिल्ली, सितंबर 09। अपीलेट अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ने एक बयान में बताया है कि फ्लेवर्ड मिल्क वास्तव में पूरी तरह से दूध नहीं है, यह एक पेय पदार्थ है जिसमें दूध की सिमित मात्रा होती है। दूध वस्तु एवं सेवा कर के दायरे से बाहर है लेकिन फ्लेवर्ड दूध पर 12 प्रतिशत कर लगाया जाता है। आइसक्रीम निर्माता कंपनी वाडीलाल ने मामले पर स्पष्टता के लिए शीर्ष अपीलीय प्राधिकारी का रुख किया था। कंपनी के अपील पर अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) ने पहले निर्णय दिया था कि फ्लेवर्ड दूध पर जीएसटी लागू होना चाहिए, जिसके बाद बाडिलाल ने हाई अपिलेट ऑथोरिटी एएएआर से संपर्क किया था।

फ्लेवर्ड दूध, दूध का प्राकृतिक रूप नहीं है

फ्लेवर्ड दूध, दूध का प्राकृतिक रूप नहीं है

एएएआर ने फैसला सुनाया कि फ्लेवर्ड दूध दूध का प्राकृतिक रूप नहीं है, बल्कि दूध पर विशिष्ट प्रक्रियाओं और पदार्थों के मेल के बाद प्राप्त किया गया एक पेय पदार्थ है। एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी के तहत उत्पादों का वर्गीकरण करने के लिए सामान्य बोलचाल, अंतिम उपयोग, तकनीकी विशिष्टताओं, उत्पादों के घटकों आदि जैसे पहलुओं को देखने की आवश्यकता है। इस विशेष मामले में, अधिकारियों ने सामान्य बोलचाल के बजाय उत्पाद की सामग्री को प्राथमिकता दी है। दही से लेकर लस्सी तक दूध से बनने वाले हर उत्पाद पर जीएसटी ढांचे के तहत एक समान कर के कैटेगरी में रखा जाता है।

सभी दूध के उत्पादो पर नहीं लगती है जीएसटी

सभी दूध के उत्पादो पर नहीं लगती है जीएसटी

जीएसटी ढांचे के तहत, दूध के साथ-साथ मीठा दही आधारित पेय लस्सी दोनों को किसी भी कर से छूट दी गई है। इसी कड़ी में फ्लेवर्ड लस्सी जीएसटी के दायरे से बाहर बनी हुई है, जबकि फ्लेवर्ड दूध पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी ढांचे के तहत उत्पाद वर्गीकरण केवल इस तरह के फैसलों के कारण जटिल होता जा रहा है। अधिकारी ने कहा "भले ही दूध में स्वाद मिला दिया जाए, आम बोलचाल के तहत, अधिकांश लोग अभी भी उत्पाद को दूध के रूप में मानते हैं, न कि अन्य पेय के रूप में। इसलिए इस याचिका को अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया"।

सभी उत्पादो पर लगता है अलग-अलग जीएसटी

सभी उत्पादो पर लगता है अलग-अलग जीएसटी

 

इससे पहले भी, कई एएआर ने खाद्य पदार्थों पर लागू वस्तु एवं सेवा कर पर अपना निर्णय दिया है। पराठा पराठे के समान नहीं बल्कि नान के समान होता है, और काउंटर पर और दुकान के बाहर एक कुर्सी पर खाए जाने वाले समोसे का स्वाद शायद अलग होता है, इसलिए इसलिए सभी समानों पर अलग-अलग टैक्स लगना चाहिए।

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