नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 42वीं वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की बैठक में जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर को 2022 से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार 2024 तक इस उपकर का विस्तार किया जाएगा और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी। बता दें कि बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में सीतारमण ने बताया कि इस साल क्षतिपूर्ति उपकर के रूप में कलेक्ट किए गए 20000 करोड़ रु राज्यों को दिए जाएंगे। इसके अलावा उन राज्यों को 24000 करोड़ रु का इंटीग्रेटेड जीएसटी दिया जाएगा, जिन्हें सामान्य से कम राशि मिली है। इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र और राज्यों के बराबार बांटी जाती है। ऐसे राज्यों को अगले सप्ताह के अंत तक राशि प्राप्त होगी।

5 करोड़ रु से कम टर्नओवर वालों को राहत
1 जनवरी से उन करदाताओं को, जिनका वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम रहता है, को मासिक GSTR-1 और GSTR-3B रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय वे अब इसे तिमाही आधार पर दाखिल कर सकेंगे।
टल गया अहम फैसला
बता दें कि राज्यों के लिए लंबित जीएसटी मुआवजे पर फैसला फिर से स्थगित कर दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि लगभग 20-21 राज्यों ने केंद्र द्वारा दिया गया पहला विकल्प चुना जिसमें राज्यों को मुआवजे की कमी को कवर करने के लिए उधार लेना है। सीतारमण ने कहा कि अन्य राज्यों चाहते हैं कि केंद्र ले और भुगतान पूरा करे।
क्या है राज्यों की मांग
जीएसटी काउंसिल की बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की उपस्थिति में सुबह 11 बजे शुरू हुई, जो कि जीएसटी क्षतिपूर्ति कमी को पूरा करने के केंद्र के प्रस्ताव को लेकर बहुत अहम है। भाजपा नीत एनडीए सरकार ने राज्यों को उधार देने के लिए 97,000 करोड़ रुपये की स्पेशल विंडो का प्रस्ताव रखा था। मगर दस राज्य मांग कर रहे हैं कि उनके बजाय केंद्र को खुद उधार लेना चाहिए और राज्यों को पैसा मुहैया करना चाहिए।
केंद्र ने बढ़ाई उधार लिमिट
केंद्र ने राज्यों के सामने पहले पेश की गयी उधार सीमा को 97,000 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 1.1 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पिछले वित्त वर्ष के लिए 10% के पहले के अनुमान के बजाय 7% की वृद्धि दर मानी गयी है। इस प्रस्ताव को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो रही जीएसटी परिषद की बैठक में रखा गया है। कई राज्यों ने इस बढ़ी हुआ सीमा का विरोध भी किया है। उनका कहना है 7% विकास दर पिछले साल दर्ज की गई 2-3% की वास्तविक दर से कहीं अधिक थी। 27 अगस्त को जीएसटी परिषद की बैठक में केंद्र ने राज्यों के सामने प्रस्ताव रखा था कि राज्य या तो 97000 करोड़ रु का कर्ज ले सकते हैं, जो जीएसटी ट्रांजिशन के कारण हुई हानि के बराबर है। या फिर 2.35 लाख करोड़ रु का कर्ज ले सकते हैं, जो जीएसटी ट्रांजिशन और कोरोना के कारण हुए नुकसान के बराबर है।
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