GST मुआवजा : राज्यों की बल्ले-बल्ले, मार्च 2026 तक मिलेगा केंद्र सरकार से पैसा

नई दिल्ली, जून 25। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) मामले में राज्यों के लिए एक अच्छी खबर आई है। दरअसल केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए जीएसटी मुआवजा की अवधि को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया था, जिसके लिए अब अधिसूचना जारी कर दी गयी है। एक गैजेट अधिसूचना के माध्यम से, वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 तक इस विस्तारित अवधि की पुष्टि की। इससे मई और जून 2022 के महीने के लिए राज्यों को मुआवजे का भुगतान करने में भी मदद मिलेगी।

कब हुआ था फैसला

कब हुआ था फैसला

सितंबर 2021 की जीएसटी परिषद की बैठक में इस मसले पर सहमति बनी थी, जिसके बाद अब इस विस्तारित अवधि को अधिसूचित किया गया है। राज्यों को वादा किए गए मुआवजे का भुगतान करने के लिए पहले किए गए उधार को चुकाने के लिए विस्तार की सुविधा है। जीएसटी मुआवजा सेस माल एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम 2017 द्वारा लगाया जाता है। इस उपकर को लगाने का उद्देश्य राज्यों को 1 जुलाई 2017 को जीएसटी के लागू होने के कारण होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई करना है। इसके लिए 5 साल का जीएसटी परिषद द्वारा तय अवधि तक राज्यों को मुआवजे का प्रावधान है।

30 जून 2022 थी लास्ट डेट

30 जून 2022 थी लास्ट डेट

राज्यों को मुआवजे की अंतिम तिथि इसी साल 30 जून थी, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता और राज्य के वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में राज्यों द्वारा लिए गए लोन को चुकाने के लिए इसे मार्च 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया। राज्यों ने अपने राजस्व संग्रह में कमी के कारण लोन लिया था, जिसकी अनुमति केंद्र सरकार ने ही दी थी।

यह हुआ था फैसला

यह हुआ था फैसला

पिछले साल सितंबर में लखनऊ में 45वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा था कि राज्यों को उनके टैक्स जैसे वैट को समान राष्ट्रीय कर जीएसटी में शामिल करने के परिणामस्वरूप राजस्व की कमी के लिए मुआवजे का भुगतान करने की व्यवस्था जून 2022 में समाप्त हो जाएगी। हालांकि, विलासिता और अवगुण वस्तुओं पर लगाया जाने वाला मुआवजा सेस, जीएसटी राजस्व हानि के लिए राज्यों को क्षतिपूर्ति करने के लिए 2020-21 और 2021-22 में किए गए उधारों को चुकाने के लिए मार्च 2026 तक एकत्र किया जाना जारी रहेगा। केंद्र ने राज्यों के 2021-22 में उधार के लिए ब्याज लागत के रूप में 7,500 करोड़ रु चुकाए हैं और इस वित्तीय वर्ष में 14,000 करोड़ रु का भुगतान किया जाना है। 2023-24 से मूलधन की अदायगी शुरू हो जाएगी जो मार्च 2026 तक जारी रहेगी।

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