भारत ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अप्रैल महीने में जीएसटी (GST) कलेक्शन ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कुल रेवेन्यू 2.10 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 12.4 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया है। देश भर में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और घरेलू खपत ने इस शानदार ग्रोथ को रफ्तार दी है। मार्च के दौरान मजबूत कारोबारी माहौल की वजह से टैक्सपेयर्स ने भी टैक्स भरने में काफी तत्परता दिखाई है।
टैक्स के इस रिकॉर्ड कलेक्शन से सरकार को भविष्य के खर्चों के लिए बड़ी राहत मिली है। जानकारों का मानना है कि रेवेन्यू में आई इस मजबूती से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सोशल वेलफेयर स्कीमों को काफी सपोर्ट मिलेगा। बेहतर कलेक्शन इस बात का भी संकेत है कि त्योहारों के दौरान बाजार में जो डिमांड बढ़ी थी, वह अब टैक्स रेवेन्यू में तब्दील हो रही है। साथ ही, यह भी साफ हो गया है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम अब टैक्स चोरी रोकने में पूरी तरह कारगर साबित हो रहा है। इस शुरुआत ने नए वित्त वर्ष के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया है।

GST कलेक्शन में दम और बाजार का भरोसा
टैक्स के इन दमदार आंकड़ों का शेयर बाजार ने भी गर्मजोशी से स्वागत किया है, क्योंकि इससे कॉर्पोरेट सेक्टर की अच्छी सेहत का पता चलता है। निवेशकों के लिए ये आंकड़े शहरी इलाकों में बढ़ती कंज्यूमर डिमांड का पुख्ता सबूत हैं। टैक्स कलेक्शन बढ़ने से केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) कम होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बन जाएगा। फिलहाल रिटेल और ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनियों में अच्छी हलचल देखी जा रही है।
कलेक्शन के आंकड़ों को देखें तो केंद्र और राज्य, दोनों ही स्तरों पर प्रदर्शन शानदार रहा है। इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट गतिविधियों में तेजी की वजह से इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई है। ग्रोथ का यह संतुलित ग्राफ बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था के सभी पहिए सही दिशा में घूम रहे हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस लिक्विडिटी से गर्मियों के महीनों में बैंकिंग सेक्टर भी मजबूत बना रहेगा और बैंक नए औद्योगिक विस्तार के लिए कर्ज देने की बेहतर स्थिति में होंगे।
नीचे दी गई टेबल में हालिया कलेक्शन पीरियड के प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं:
| टैक्स कैटेगरी | कलेक्शन की राशि (वर्तमान) | सालाना ग्रोथ (YoY) |
|---|---|---|
| कुल जीएसटी रेवेन्यू | ₹2.10 लाख करोड़ | 12.4% की बढ़ोतरी |
| सेंट्रल जीएसटी (CGST) | ₹43,846 करोड़ | बड़ी बढ़त |
| स्टेट जीएसटी (SGST) | ₹53,538 करोड़ | शानदार मुनाफा |
| सेस (Cess) कलेक्शन | ₹13,260 करोड़ | स्थिर ग्रोथ |
राज्यों की तिजोरी और महंगाई पर असर
टैक्स रेवेन्यू बढ़ने से राज्य सरकारों को भी उनके हिस्से की ज्यादा रकम मिलेगी। इस अतिरिक्त फंड से राज्यों को अपने स्थानीय कर्ज मैनेज करने और जन कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से चलाने में मदद मिलेगी। अब कई राज्य बाजार से कर्ज लेने के बजाय इस सरप्लस फंड के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और ग्रामीण विकास पर ध्यान दे सकेंगे। यह बदलाव भारत के राजकोषीय संघवाद (fiscal federalism) और सहकारी शासन को और मजबूती देगा।
हालांकि, रेवेन्यू रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद महंगाई एक बड़ी चिंता बनी हुई है। भारी कलेक्शन की वजह से हो सकता है कि सरकार जरूरी चीजों या सेवाओं पर टैक्स कटौती के फैसले को फिलहाल टाल दे। लेकिन, सरकार इस सरप्लस का इस्तेमाल ईंधन या खाद्य पदार्थों पर सब्सिडी देने के लिए कर सकती है। ऐसे कदमों से मिडिल क्लास परिवारों के लिए रिटेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। भविष्य में खपत के स्तर को ऊंचा बनाए रखने के लिए टैक्स दरों का संतुलित होना बेहद जरूरी है।
GST दरों में बदलाव और भविष्य की राह
जीएसटी काउंसिल अब विभिन्न वस्तुओं के लिए मौजूदा टैक्स स्लैब पर दोबारा विचार कर सकती है। टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाकर तीन स्तरों (three-tier) पर लाने की मांग लगातार बढ़ रही है। रिकॉर्ड कलेक्शन से काउंसिल का भरोसा बढ़ा है कि वे रेवेन्यू घटने के डर के बिना टैक्स रेट में कटौती कर सकते हैं। बिजनेस जगत को उम्मीद है कि इंश्योरेंस और एंट्री-लेवल कारों जैसे सेक्टर में राहत मिल सकती है, जिससे डिमांड और बढ़ेगी और ग्रोथ का यह चक्र बना रहेगा।
रेवेन्यू में आया यह उछाल संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से मैच्योर हो रही है। बेहतर डेटा ट्रैकिंग और नियमों के सख्त पालन की वजह से अप्रैल में ये रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े हासिल हुए हैं। सरकार जिस तरह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही है, उससे आने वाले समय में टैक्सपेयर्स को और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर, यह वित्त वर्ष टैक्सपेयर और सरकारी खजाने, दोनों के लिए काफी उम्मीदों भरा नजर आ रहा है।


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