GR Exclusive: Stock Market Prediction, शेयर बाजार में लगातार करेक्शन देखने को मिल रहा. फरवरी में लगातार 5वें महीने बाजार के प्रमुख इंडेक्स टूटे. इससे पहले 1996 में इतनी लंबी बिकवाली देखने को मिली थी. 5 महीने से जारी गिरावट का सिलसिला अक्टूबर 2024 से शुरू है. इससे पहले सितंबर 2024 में मार्केट ने ऑल टाइम हाई टच किया. लेकिन हाई वैल्युएशंस और फिर आगे अमरेकी टैरिफ जैसे ट्रिगर्स ने बाजार पर जोरदार दबाव बनाया. मार्केट की गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान स्मॉलकैप और मिडकैप सेक्टर में निवेशत इनवेस्टर्स को नुकसान हुआ. बुरी खबर ये है कि हाई वैल्युएशंस के चलते दोनों सेक्टर में आगे भी गिरावट का ट्रेंड जारी रहने की आशंका है.
रिकॉर्ड हाई से स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 28% तक फिसल गया है. केवल फरवरी महीने में सेंसेक्स और निफ्टी 5-6% तक फिसले. बाजार में करेक्शन का ट्रिगर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से निकासी है, जिन्होंने 2025 में केवल 2 महीने में ही 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि शेयर बाजार में जारी गिरावट आगे कितना लंबा चल सकता है? मार्केट के लिए आगे किन ट्रिगर्स अहम हैं? बाजार की गिरावट में कहां निवेश का मौका बन रहा है? इन सभी सवालों के जवाब के लिए हमने मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के रिसर्च वीपी स्नेहा पोद्दार से एक्सक्लूसिव बातचीत की...
सवाल-1: शेयर बाजार के लिए टैरिफ, हाई वैल्युएशंस ही ट्रिगर्स हैं या फिर कोई फैक्टर मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं?
जवाब-1: शेयर बाजार में पिछले 4-5 महीने से करेक्शन चल रहा है, जिसकी शुरुआत हाई वैल्युएशंस और अर्निंग्स में धीमेपन की वजह से हुई थी. इसके अलावा मैक्रो फैक्टर्स में भी थोड़ी थकावट देखने को मिली. उसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर शुरू कर दी. डॉलर इंडेक्स भी ऑल टाइम हाई पर चल रहा था. इसके अलावा विदेशी निवेशकों को भी कंफर्ट नहीं मिल रहा था, जिससे उन्होंने लगातार बिकवाली की. इन वजहों से बाजार में लगातार गिरावट दिखी. मौजूदा समय में डॉमेस्टिक फ्रंट की बात करें तो लार्जकैप अपने फेयर लेवल पर पहुंच गया है. हालांकि, अभी भी मिडकैप और स्मॉलकैप थोड़े प्रीमियम वैल्युएशंस पर हैं. ऐसे में मिड और स्मॉलकैप में वॉलेटैलिटी बने रहने की आशंका है. अगली कुछ तिमाहियों तक अर्निंग्स में स्लोडाउन देखने को मिलेगा. क्योंकि घरेलू खपत में भी धीमापन है. साथ ही टैरिफ के चलते ग्लोबल अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके असर का अनुमान लगा पाना मुश्किल है.
सवाल-2: मार्च के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी को किस लेवल पर देख रही हैं?
जवाब-2: संभव है कि निफ्टी में आगे बाउंसबैक देखने को मिले. क्योंकि लोगों को उम्मीद है कि मैक्सिको, कनाडा और चीन की ओर से काउंटर टैरिफ के चलते अमेरिकी उन्हें टैरिफ पर कुछ राहत दे सकता है. अगर यह राहत मिलती है तो बाजार में शॉर्ट टर्म के लिए रीलीफ रैली देखने को मिल सकती है. लेकिन मार्च के अंत तक बाजार में गिरावट गहरा सकता है. क्योंकि 2 अप्रैल से भारत पर अमेरिकी टैरिफ लागू होंगे. इसके बाद हमें क्लैरिटी मिलेगा कि भारत पर क्या टैरिफ लगने वाला है.
सवाल-3: क्या निफ्टी 50 इंडेक्स नीचे 18000 से 20000 के लेवल तक फिसल सकता है?
जवाब-3: देखिए बेयरिश सेंटीमेंट तो कोई भी लेवल नीचे में टूट सकता है. लेकिन अगर फेयर वैल्युएशंस के बेस पर बात करें तो निफ्टी 21800/21300 तक फिसल सकता है. इस लेवल पर मार्केट को स्थिर होना चाहिए. इस दौरान अगर कुछ बहुत बुरी खबर या ट्रिगर बने तो इन लेवल्स के भी नीचे फिसल सकता है, बाकी इसके नीचे जाना फिलहाल संभव नहीं लग रहा है.

सवाल-4: 2025 में अब तक केवल 2 महीने FIIs 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली की है. आपको क्या लगता है कि बाजार में फॉरेन इनवेस्टर्स कब तक नेट बायर्स बन जाएंगे?
जवाब-4: यह बोलना थोड़ा मुश्किल है कि FIIs कब नेट बायर्स होंगे. क्योंकि इसके लिए कई ग्लोबल फैक्टर्स शामिल हैं. आगे जाकर ब्याज दरें घटेंगी या नहीं. डोनाल्ड ट्रंप किन देशों पर टैरिफ लगाएंगे. यूरोप पर भी टैरिफ लगाने की बात चल रही है. लिस्ट में भारत समेत अन्य इमर्जिंग मार्केट शामिल हैं. घरेलू ट्रिगर्स के तौर पर देखें तो अर्निंग्स सेंटीमेंट काफी पॉजिटिव नहीं हैं. हालांकि, हम यह बोल सकते हैं कि अप्रैल के दूसरे हाफ से FIIs वापसी कर सकते हैं. क्योंकि तब अर्निंग स्थिर हो जाएंगे. साथ ही उस समय तक वैल्युएशंस काफी कंफर्ट लेवल तक आ जाएंगे.
सवाल-5: क्या कैपिटल गेन टैक्स बढ़ने की वजह से फॉरेन इनवेस्टर्स की ओर से बिकवाली की जारी रही है?
जवाब-5: देखिए कैपिटल गेन टैक्स पहली बार नहीं बढ़ा है. पहले भी कई बार टैक्सेज में बदलाव किए गए हैं. टैक्स में बढ़ोतरी का शॉर्ट टर्म प्रभाव हमें देखने को मिला है. हालांकि, कैपिटेन गेन टैक्स बढ़ने का बज मार्केट था और ये फैक्टर-इन भी हो चुका है. FIIs के लिए ज्यादा इंपोर्टेंट यूएस डॉलर किस लेवल पर रहता है, ब्याज दरें सिनारियो रहेगा इन सब ट्रिगर्स पर होगा.
सवाल-6: नए फाइनेंशियल ईयर यानी FY26 की शुरुआत होने वाला है. ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी को आप किस लेवल पर देख रही हैं? साथ ही किन इवेंट्स पर खास फोकस होगा?
जबाव-6: बाजार के नजरिए से नए फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो अभी 2-3 महीने में यह स्थिर ही होगा. उसके बाद हम थोड़ा करेक्शन भी दिख सकता है. क्योंकि अर्निंग्स बहुत ज्यादा सपोर्टिव नहीं रहेंगे. तो सेकंड हाफ से जो रिकवरी आनी चाहिए वो एक ट्रिगर पॉइंट रहेगा. मार्केट लेवल की बात करें तो वापस हम निफ्टी के लिए 24000 और 25000 की उम्मीद कर सकते हैं. हालांकि, पिछला रिकॉर्ड टच कर पाना FY26 में मुश्किल है. प्रमुख इवेंट्स की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप की फाइनल टैरिफ पॉलिसी की क्लीयरिटी रहेगा और यह कितना ट्रेड वॉर से बढ़ता है इस पर नजर रहेगी. साथ ही ग्लोबल लेवल पर जो मौजूदा लेवल पर जियो-पॉलिटिकल लेवल पर स्थिति है वहां कहीं ना कहीं स्थिरता आना बहुत जरूरी है. इसमें भारत के लिए पॉजिटिव पॉइंट यह है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन से ऑयल प्राइसेज गिरे हैं इसका फायदा मिलेगा. क्योंकि भारत एक नेट इंपोर्टर है. क्रूड प्राइसेज के कम होने से कंपनियों के लिए रॉ मैटेरियल कॉस्ट को कम करने में मदद करेगा. साथ ही ब्याज दरों पर रिजर्व बैंक के एक्शन पर भी नजर रहेगी. वो आगे रेट कट करता है या नहीं. ऐसे में यहां से मार्केट फॉल के बाद रिकवर करना चाहिए. वापस अपने पिछले रिकॉर्ड हाई को छूने का कोशिश करेगा.
सवाल-7: शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच किन सेक्टर्स पर आपकी नजर है?
जवाब-7: तो आपने देखा होगा कि सरकार का फोकस कंज्प्शन रिवाइवल पर है. ऐसे में हमें उम्मीद है कि कंज्युमर डिस्क्रेशनरी सेगमेंट यहां से रिवाइव होना स्टार्ट करेंगा. रूरल लेवल पर रिकवरी आ चुका है. जो अर्बन धीमापन वो पहली और फिर दूसरी तिमाही से से रिकवर करते हुए दिख सकता है. कंज्युमर डिस्क्रिशनरी सेगमेंट में ज्वैलरी, रिटेल, ट्रैवल और ऑटो रिकवरी देखने को मिल सकती है. क्योंकि ग्राहकों के हाथ में एक्स्ट्रा इनकम आने से पर्चेजिंग पावर बढ़ जाएगी. निवेश की बात करें BFSI सेगमेंट में बैंकिंग के साथ-साथ NBFC में वैल्युएशंस कंफर्टेबल हैं. RBI के रेट कट के बाद तो इनके क्रेडिट कॉस्ट पीक-आउट होते नजर आ रहे. यहां से NBFC सेक्टर में निवेश का बढ़िया मौका बनता जा रहा है. बैंकिंग में क्रेडिट में धीमापन दिखा है लेकिन एसेट क्वाली बरकरार रही.
सवाल-8: निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म नजरिए से क्या सलाह देना चाहेंगी आप?
जवाब-8: शॉर्ट टर्म के लिए मेरी पसंद वरुण बेवरेजेज पसंद है. गर्मियों का सीजन लगभग शुरू हो गया है. कुछ राज्यों में फरवरी का महीना भी गर्म रहा. वॉल्युम अपटिक काफी मजबूत हैं. रिलायंस के कैंपा कोला लॉन्च होने से शेयर में काफी गिरावट देखा जा चुका है. क्योंकि कंपिटीशन का डर था. हमारा मानना है कि काफी प्लेयर्स इसमें सर्वाइव कर सकते हैं. कंपिटीशन बड़ा फैक्टर नहीं है. अफ्रीकी बाजारों में कंपनी काफी तेजी से विस्तार कर रही. दूसरी पिक ICICI बैंक है. तिमाही दर तिमाही बैंक ने दमदार नतीजे पेश किए हैं. एसेट क्वालिटी भी हमेशा बरकरार रही है. ग्रैडुअलरी हायर लेंडिंग पोर्टफोलियो की तरफ मूव कर रही है, जोकि हाई मार्जिन है.
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