Windfall Tax: विंडफॉल टैक्स को लेकर बड़ी खबर है. वित्त मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), कच्चे तेल, डीजल और पेट्रोल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को खत्म करने का फैसला किया है. इस बदलाव की घोषणा आज 2 दिसंबर, 2024 को की गई. इस विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को हटाना तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. इस पर संसद में अधिसूचना पेश की गई.
विंडफॉल टैक्स की शुरुआत जुलाई 2022 में शुरू की गई थी. इसे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से लाभ उठाने वाले उत्पादकों से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने के लिए लागू किया गया था. इस योजना के तहत कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल, पेट्रोल और एटीएफ के निर्यात पर भी कर लगाया गया था.
इन बदलावों के बारे में एक अधिसूचना संसद में पेश की गई है. सरकार के इस फैसले को ऑयल सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि फिस्कल पॉलिसीज मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनी रहें.
दरअसल, विंडफॉल टैक्स की शुरुआत का उद्देश्य हाई ग्लोबल प्राइसेज के दौरान ऑयल कंपनियों द्वारा किए गए असाधारण मुनाफे पर कर लगाकर अतिरिक्त सरकारी राजस्व उत्पन्न करना था. यह नीति अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की व्यापक राजकोषीय रणनीति का हिस्सा थी।
विंडफॉल टैक्स का बैकग्राउंड
सरकार ने इन टैक्सेज को SAED के रूप में लगाया, और दो सप्ताह में औसत तेल कीमतों के आधार पर इन्हें हर 15 दिन में एडजस्ट किया. अंतिम एडजस्टमेंट 31 अगस्त को हुआ, जिसमें क्रूड पेट्रोलियम पर विंडफॉल टैक्स 1,850 रुपये प्रति टन फिक्स किया गया. हालांकि, 18 सितंबर से डीजल, पेट्रोल और एटीएफ निर्यात पर SAED को 'शून्य' पर बनाए रखा गया है.

विंडफॉल टैक्स को खत्म करने का फैसला मौजूदा बाजार स्थितियों के अनुरूप है. कच्चे तेल की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच रेंज में हैं. यह सीमा उस समय की तुलना में काफी कम है जब टैक्स पहली बार लागू किया गया था. चीन से मांग में कमी और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने जैसे फैक्टर्स ने इस कीमत में गिरावट में अहम भूमिका निभाई है.


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