सरकार जल्द ही तंबाकू से संबंधित बड़ा नियम लाने की योजना बना रही है. यह नियम सीधे तौर पर तंबाकू के प्रचार गतिविधियों पर काम करेगा. सरकार की योजना FDI (विदेशी निवेश) के नियमों में बदलाव करना है. ताकि तंबाकू के प्रचार पर रोकथाम की जा सकें.

तंबाकू से संबंधित FDI के अभी ये है नियम
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक अभी तंबाकू के सिगार, सिगरेट, चुरूट के मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी निवेश डायरेक्ट नहीं हो सकता है. हालांकि तंबाकू क्षेत्र में किसी तरह के टेक्नोलॉजी सहायता में विदेशी निवेश किया जा सकता है. इनमें फ्रेंचाइजी के लिए लाइसेंस, ट्रेडमार्क, ब्रांड नाम और मैनेजमेंट शामिल हैं.
इन नियम पर हो रहा है काम
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री तंबाकू सेक्टर पर काम करने वाले एक अधिकारी ने कहा कि तंबाकू क्षेत्र में एफडीआई प्रतिबंध है और अब सरकार इसकी प्रचार गतिविधियों पर भी रोक लगाने पर विचार कर रही है. यह भी पता चला है कि भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तंबाकू नियंत्रण पर संधि की थी. इस संधि करने वाले देश पर यह जिम्मेदारियां है कि तंबाकू का उत्पादन कम से कम हो.
2016 में की थी नियम बदलने की कोशिश
2016 में सरकार ने तंबाकू क्षेत्र में लगने वाला विदेशी निवेश पर पूरी तरह से बैन लगाने का फैसला किया था. इस बैन के तहत तंबाकू से संबंधित किसी भी क्षेत्र में विदेशी निवेश करने की अनुमति नहीं थी. लेकिन तम्बाकू से जुड़े किसान और कंपनियों सहित कुछ अन्य लोगों के रोजगार की चिंताओं के कारण सरकार इस पर पूरी तरह से निर्णय नहीं ले सकी.
सिर्फ तंबाकू पर बढ़ रहा विदेशी निवेश है चिंता
इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार सेवाओं, कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, वाहन और फार्मा में विदेशी निवेश कम हो रहा है. भारत का एफडीआई इक्विटी 3.49 प्रतिशत घट गया है. 2022-23 के दौरान एफडीआई प्रवाह 46.03 अरब डॉलर रहा था, लेकिन 2023-24 के दौरान यह 44.42 अरब अमेरिकी डॉलर ही रह गया है. इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया है कि तंबाकू में विदेशी निवेश कम किया जाए.


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