नयी दिल्ली। जीएसटी सिस्टम के लागू होने के लगभग 2.5 साल बाद जीएसटी काउंसिल टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी करने को लेकर विचार कर सकती है। अगर टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी होती है तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ सकता है। जीएसटी की दरों में वृद्धि से रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजें भी महंगी होंगी। आपको बता दें कि 5 फीसदी जीएसटी वाली वस्तुओं पर टैक्स रेट बढ़ा कर 6 फीसदी किया जा सकता है। जीएसटी की दरों में वृद्धि के पीछे सरकार का उद्देश्य 1 लाख रुपये का अतिरिक्त रेवेन्यू हासिल करना है। 5 फीसदी रेट को अगर बढ़ा कर 6 फीसदी कर दिया जाये तो एक अनुमान को मुताबिक सरकार को 1,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। वहीं सरकार की योजना 12 फीसदी टैक्स स्लैब को खत्म करके इस सेगमेंट में आने वाली 243 चीजों को 18 फीसदी वाले स्लैब में डाला जा सकता है। इस समय जीएसटी में 4 टैक्स स्लैब हैं, जिनमें 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी टैक्स रेट शामिल हैं।
बढ़ाया जाएगा टैक्स, जाने क्या-क्या होगा महंगा
आपको बता दें कि 5 फीसदी वाले टैक्स स्लैब से सरकार को कुल जीएसटी कलेक्शन का 5 फीसदी ही हासिल होता है। सरकार का मासिक जीएसटी कलेक्शन लक्ष्य 1.18 लाख करोड़ रुपये का है। अगर टैक्स रेट में वृद्धि होती है तो 5 फीसदी वाले जो सामान महंगे होंगे उनमें ब्रांडेड सेरियल्स, आटा, पनीर, इकोनॉमी क्लास में हवाई यात्रा, ट्रेन के फर्स्ट और सेकंड क्लास के टिकट, ओलिव ऑयल, पिज्जा, ब्रेड और टूर सर्विसेज शामिल हैं। वहीं 12 फीसदी वाले स्लैब में मोबाइल फोन, बिजनेस क्लास हवाई यात्रा, सरकारी लॉटरी, महंगी पेंटिग्स और 5000-7000 रुपये किराये वाले होटल रूम महंगे हो जायेंगे। जीएसटी काउंसिल 18 दिसंबर को बैठक करेगा, जिसमें टैक्स रेट, क्षतिपूर्ति सेस रेट और छूट वाली वस्तुओं की समीक्षा शामिल है।
पहले घटायी गयी हैं दरें
जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सैकड़ों वस्तुओं पर टैक्स रेट कम भी की गयी है, जिससे टैक्स की प्रभावी दर 14.4 फीसदी से कम होकर 11.6 फीसदी पर आ गयी है। मगर इससे सरकार के रेवेन्यू में तगड़ा झटका भी लगा। सरकार का सालाना रेवेन्यू 2 लाख करोड़ रुपये घट गया। वहीं पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार सी अरविंद सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा प्रस्तावित 15.3 फीसदी की राजस्व-तटस्थ दर की तुलना में रेवेन्यू में गिरावट 2.5 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। अब सरकार उन चीजों को भी जीएसटी के दायरे में ला सकती है, जो अभी तक इससे बाहर हैं। इनमें जूट के रेशे, दही, छाछ, सोयाबीन और कॉफी बीन्स शामिल हैं।
नवंबर में बढ़ा जीएसटी कलेक्शन
नवंबर में जीएसटी कलेक्शन फिर से 1 लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा पार कर गया। नवंबर में सरकार जीएसटी रेवेन्यू 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पहले अक्टूबर में यह 95,380 करोड़ रुपये और सितंबर में 91,916 करोड़ रुपये रहा था, जो इसका पिछले 19 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इसी को देखते हुए सरकार ने अक्टूबर में एक समिति का गठन किया था, जिसका उद्देश्य जीएसटी कलेक्शन को बढ़ावा देना और कारोबारियों को स्वेच्छा से जीएसटी भरवाना था। अर्थव्यवस्था में सुस्ती और निवेश में आयी कमी के कारण भी सरकार जीएसटी कलेक्शन पर जोर दे रही है।
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