PSU Disinvestment : मोदी सरकार विनिवेश को लेकर काफी आक्रामक रही है। इस बात का जिक्र मोदी सरकार की तरफ से खुल कर किया गया है। 2022 के बजट में भी विनिवेश के लिए एक टार्गेट रखा गया था। अब केंद्र सरकार इसी कड़ी में एक सरकारी कंपनी को बेचने की तैयारी कर रही है। मगर अब जिस कंपनी के बिकने की बात सामने आई है, वो सरकार के लिए कमाई के लिहाज से बहुत अहम है। बल्कि कहा जा रहा है कि यह कंपनी सरकार के लिए सोने का अंडा देने वाला मुर्गी है। आगे जानिए इस कंपनी की पूरी डिटेल।
2023 में बेचने की तैयारी
सरकार का इरादा 2023 में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) को बेचने का है। इसके साथ ही इसकी एक सहायक कंपनी का भी विनिवेश किया जाएगा। लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित करने की योजना बना रही है। इनके लिए अगले साल जनवरी के अंत तक आवेदन मांगे जा सकते हैं। इस कंपनी को खरीदने में देश के तीन अहम बिजनेस ग्रुप ने रुचि दिखाई है।
टाटा और अडानी हैं कंटेंडर
टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और अडानी ग्रुप इस कंपनी को खरीदने में रुचि रखते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों ने कथित तौर पर दिसंबर की शुरुआत में इन कंपनियों के लिए आयोजित प्री-बिड कंस्लटेशंस के दौरान अपनी रुचि जाहिर की थी। इन प्रमुख स्टील फर्मों के साथ कंपनियों की बिक्री पर चर्चा करने के लिए सरकार ने नवंबर और दिसंबर में चर्चा की थी।
पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
अनुमान है कि दिसंबर के अंत तक कंपनी की वैल्युएशन को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इतना ही नहीं सरकार एक ही बार में इनकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। असल में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने जनवरी 2021 में आरआईएनएल में पूरी 100 फीसदी सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए मंजूरी दे दी थी।
सरकार को मिला जोरदार रेस्पोंस
इकोनॉमिक टाइम्स के रिपोर्ट के अनुसार चर्चा के दौरान आरआईएनएल के लिए सरकार को बहुत अच्छा रेस्पोंस मिला था। तब ही टाटा स्टील, अडानी समूह और जेएसडब्ल्यू स्टील समेत सात कंपनियों ने इसे खरीदने में अपनी रुचि व्यक्त की थी।
क्यों है सोने का अंडा देने वाली मुर्गी
सवाल यह है कि आखिर आरआईएनएल क्यों एक सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है। कंपनी भारत में टॉप छह स्टील प्रॉड्यूसर्स में से एक है। इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 7.5 मिलियन टन है। इसने 2021-22 वित्तीय वर्ष के लिए 913 करोड़ रुपये का लाभ और 28,215 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कंपनी कितने फायदे वाली यूनिट है।
आईडीबीआई बैंक को बेचने की तैयारी
एक अन्य खबर के अनुसार आईडीबीआई बैंक के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना है। असल में बैंक के लेनदेन सलाहकार ने इस डेट के विस्तार के लिए अनुरोध किया है। ईओआई जमा करने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर है। अक्टूबर में, सरकार और एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में प्रत्येक में 30 प्रतिशत से थोड़ा अधिक की बिक्री करने का फैसला किया। उन्होंने मैनेजमेंट नियंत्रण के साथ कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए ईओआई आमंत्रित करते हुए एक प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी किया था।
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