RBI on Bank Minimum Balance: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि बचत खातों में न्यूनतम औसत शेष (MAB) का फैसला पूरी तरह से बैंकों का है। सोमवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह मुद्दा केंद्रीय बैंक के रेगुलेटरी जूरिडिक्शन में नहीं आता है।

गवर्नर ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने मिनिमम बैलेंस तय करने का काम बैंकों पर छोड़ दिया है। कुछ बैंकों ने इसकी सीमा 10,000 रुपये, कुछ ने 2,000 रुपये और कुछ ने इसे पूरी तरह से हटा दिया है। यह मामला नियामकीय दायरे में नहीं आता।
बता दें कि RBI गवर्नर ने आईसीआईसीआई बैंक के मिनिमम बैलेंस बढ़ाने के बाद यह बात कही है. साथ ही कहा कि यह किसी भी रेगुलेटरी जूरिडिक्शन के अंडर नहीं आता है।
ICICI बैंक ने बढ़ाया मिनिमम बैलेंस
हाल ही में प्राइवेट लेंडर ने 1 अगस्त या उसके बाद खोले गए नए बचत खातों के लिए न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता को पांच गुना बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया है। आईसीआईसीआई बैंक के ग्राहकों के लिए 31 जुलाई, 2025 तक बचत बैंक खातों में न्यूनतम मासिक औसत शेष (MAB) 10,000 रुपये था। इसी तरह, ICICI बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों के लिए एमएबी को पांच गुना बढ़ाकर क्रमश- 25,000 रुपये और 10,000 रुपये कर दिया गया है।
मिनिमम बैलेंस बैंक पर डिपेंड
RBI गवर्नर ने 11 अगस्त को कहा कि RBI ने न्यूनतम शेष राशि तय करने का काम बैंकों पर छोड़ दिया है। हर बैंक की अपनी न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता होती है। यह RBI के नियामक क्षेत्राधिकार में नहीं है।
आपको बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निजी बैंकों की तुलना में कम बैलेंस की आवश्यकता होती है। हालांकि जन धन खातों के लिए यह आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इस आवश्यकता को समाप्त कर दिया है, और जो ग्राहक न्यूनतम निर्धारित बैलेंस बनाए रखने में विफल रहते हैं, उन्हें कोई जुर्माना नहीं देना पड़ता है।
पुराने अकाउंट पर असर होगा?
अगर आप ICICI बैंक के पुराने अकाउंट वाले मौजूदा ग्राहक हैं, तो इस बदलाव का आपकी मौजूदा एमएबी जरूरत पर अभी कोई असर नहीं पड़ेगा। हालामकि, 1 अगस्त के बाद खोले गए किसी भी नए बचत खाते में ज्यादा बैलेंस रखना जरूरी होगा।


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